Jun 18, 02:07 am
चित्रकूट। राजापुर थाना क्षेत्र के जमौली गांव में दस्यु नान उर्फ घनश्याम केवट व पुलिस के बीच मंगलवार को शुरू हुई मुठभेड़ बुधवार को भी चलती रही। दूसरे दिन दस्यु नान की फायरिंग से पीएसी के कंपनी कमांडर व एक सिपाही शहीद हो गये। वहीं आईजी पीएसी व डीआईजी बांदा समेत पांच लोग घायल हो गये। घायलों को हेलीकॉप्टर से पीजीआई लखनऊ भेजा गया। समाचार लिखे जाने तक मुठभेड़ जारी थी और एडीजी बृजलाल ने अभियान की कमान संभाल ली थी।
बताते चलें कि राजापुर के जमौली गांव में मंगलवार को दस्यु नान केवट से शुरू हुई मुठभेड़ में एसओजी का जवान शमीम शहीद हो गया था और दो सिपाही घायल हो गये थे। पुलिस द्वारा गांव को चारों ओर से घेरने के बाद रातभर रुक-रुक कर फायरिंग होती रही। बुधवार सुबह पुलिस ने नये सिरे से रणनीति बनायी। जिस घर में दस्यु नान रुका था, उस घर में जब एसटीएफ टीम ने घुसने की कोशिश की तो उसने अंदर से फायरिंग कर दी। जिससे छत में पोजीशन लेकर फायरिंग कर रहे पीएसी के कंपनी कमाडर बेनीमाधव सिंह शहीद हो गये जबकि एसटीएफ के कमांडो अकरम व इंसपेक्टर नावेन्दु घायल हो गये। इसके थोड़ी देर बाद ही डीआईजी बांदा के गनर इकबाल को गोली लगी। उसे राजापुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां चिकित्सकों ने इकबाल को मृत घोषित कर दिया। दोपहर लगभग बारह बजे पुलिस ने उन घरों में आग लगा दी, जहां दस्यु नान रुका था। लगभग एक घंटा तक आग लगी रही। इस दौरान दस्यु ने भी फायरिंग बंद कर दी। बाद में फायर बिग्रेड के जवानों ने घरों में लगी आग को बुझाया। आग बुझाने के बाद उन घरों में घुसने की योजना बनायी गयी। जैसे ही पुलिस आगे बढ़ी, दस्यु नान ने फिर फायरिंग शुरू कर दी, जिससे आईजी पीएसी बीके गुप्त व डीआईजी बांदा एसके सिंह के पेट व कौशाम्बी के पश्चिम शरीरा के थाना प्रभारी मनोजकुमार मिश्र के हाथ में गोली लग गयी। घायल आईजी, डीआईजी व दरोगा को जानकीकुंड चिकित्सालय लाया गया।
घटनास्थल पर ही मौजूद जिलाधिकारी हृदयेशकुमार व एसडीएम सदर हृषिकेश भास्कर यशोद के साथ ही अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को एक समाचार चैनल की ओबी वैन की ओट लेनी पड़ी। समाचार लिखे जाने तक दोनों तरफ से जोरदार गोलीबारी जारी थी। एडीजी के साथ आईजी सूर्यकुमार शुक्ल और एसटीएफ, पीएसी व पुलिस के जवान मोर्चे पर डटे हुए थे।
इसके पूर्व मंगलवार देर शाम के बाद डाकू ने रुक-रुककर कई राउंड फायरिंग की। कच्चे-पक्के घरों के भीतर होने से उसकी स्थिति की जानकारी पुलिस को न होने के कारण कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ा। दिनभर की फायरिंग के बीच ही लगभग चार बार गांव के लगभग तीस मकानों पर एक बार डाकू व तीन बार पुलिस को आग लगानी पड़ी।
आईजी पीएसी वीके गुप्त, डीआईजी बांदा सुशीलकुमार सिंह के बाद आईजी सूर्यकुमार शुक्ल ने डाकू को सरेंडर करने की धमकी दी, जिसके बाद जोरदार गोलीबारी हुई और उसके बाद जिस मकान में डाकू छिपा था वहां पर अधिकारी यह मानकर पहुंच गये कि शायद वह मर चुका है। इसी बीच डाकू ने गोली चलाकर दोनो को गंभीर रूप से घायल कर दिया।
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