शनिवार, 4 जुलाई 2009

जवानों में भरा जा रहा आत्मविश्वास

Jul 03, 10:44 pm
चित्रकूट। 'हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा।' पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई की ये पंक्तियां यहां के जवानों को अब एक बार सुनाई जा रही हैं, और सुनाई भी क्यों न जायें जब केवल एक डाकू के कारण चार जवानों को शहीद होना पड़ा और आठ अभी अस्पताल में हैं।
वैसे जिला पुलिस के अधिकतर जवान इस मुठभेड़ के समय अपने वर्षो पुराने साजो सामान के साथ जमौली गांव में महुआ के पेड़ों के नीचे थे या फिर समीपवर्ती गांव की खाटों पर विश्राम कर रहे थे। तमाम के मुंह से तो यह भी निकला था कि 'साहब इन जंग लगी एसएलआर से हमसे डाकू मरवाओगे।' लेकिन इन सब बातों से इतर अपर पुलिस अधीक्षक जुगुल किशोर ने जवानों के अंदर आत्मविश्वास भरने का काम शुरू कर रखा है। बी पी मोबाइल मोर्चा की खूबियों से परिचित कराकर उनके अंदर डाकुओं से लड़ने का हौसला भरा जाने लगा है। उन्होंने बताया कि खुले में एम्बुश लगाने के समय बुलेटप्रूफ मोर्चा आड़ का काम करेगा। इसके साथ ही जिले में पहली बार बुलेटप्रूफ पटका भी आ चुका है। यह जवानों के सिर की रक्षा करेगा।

उतरते ही मोर्चा लेने वाली जगह पर पहुंचे एडीजी

Jul 02, 10:46 pm
चित्रकूट। पिछली बार जब एडीजी बृजलाल राजापुर थाने के गांव जमौली में आये थे तो स्थिति विषम थी। गांव में उतरते ही उन्हें बुलेटप्रूफ जैकेट के साथ एके 56 की आवश्यकता पड़ी थी और रात भर वहीं पर डेरा डालने के साथ गोलियां भी चलानी पड़ी थीं। दोबारा गांव आकर वह सबसे पहले उस स्थान पर गये जहां उन्होंने दस्यु नान पर ग्रेनेड फेंकने के साथ ही गोलियां दागी थीं।
जमौली में कार से उतरते ही साथ एडीजी बृजलाल के सामने सबसे पहले सिपाही शेखर शर्मा आ गया। तुरन्त ही उन्होंने उसकी पीठ ठोंककर शाबाशी दी। बैठकर बात करने के पहले ही डीजी पीएसी पीपीएस सिद्धू बोल पड़े कि पहले गांव घूम लिया जाये। बातें बाद में होंगी तो वे सबसे पहले उन्हें लेकर उस घर के सामने पहुंचे जहां से उन्होंने डाकू से लगभग इक्कीस घंटे मोर्चा लिया था। उन्होंने डीजी को बताया कि उन्होंने यहां से ग्रेनेड फेंका था। बाद में उन्होंने पूरे गांव का जायजा भी लिया। इस दौरान एएसपी जुगुल किशोर ने डाकू नान के गांव में आने से लेकर मारे जाने तक की बात बतायी। उनके बताने के तरीके पर प्रसन्न होकर डीजी ने कहा कि अब मुझे विश्वास हुआ कि आप के ही नेतृत्व में पूरा आपरेशन हुआ है। एसपी राकेश प्रधान भी बाद की स्थितियों के बारे में काफी देर तक चर्चा करते रहे।

नुकसान लाखों का मदद एक हजार

Jul 02, 10:33 pm
चित्रकूट। 'भइया सरकार के कर्मचारी चाहै जो कहैं पै हमैं एक हजार रूपया के साथै गल्ला भर मिला है'। यह उनके अल्फाज हैं जो एक डाकू के गांव में घुसने के कारण अपना सब कुछ गंवा चुके हैं। ग्राम जमौली के हर एक घर की कहानी अलग-अलग है, पहले डाकू के कारण पूरा गांव जला दिया गया, फिर राहत के नाम पर कहा तो काफी कुछ गया पर देने की जगह में लेखपाल की आधी-अधूरी और 'खेल' की हुई लिस्ट का सहारा लिया गया। जिसका लाखों से ज्यादा का नुकसान था उसे एक हजार मिला और जिसका नुकसान लाखों में हुआ उसको मिलने की बात तो दूर पीडि़तों की लिस्ट से नाम उड़ा दिया गया।
घटना के समय अपने रिश्तेदार की शादी में जाने वाली जुगराज की पत्नी सुनैना और अमित लाल की पत्नी कुसुम बताती है उन्हें आर्थिक सहायता के नाम पर अभी तक कुल 1000 रुपया नकद ही मिला है। इसमें न तो घर बन सकता है और न ही बर्तन कपड़े ही खरीदे जा सकते हैं। रिश्ते में जेठानी व देवरानी लगने वाली सुनैना व कुसुम बताती है कि घटना के समय वे अपने रिश्तेदार की बेटी की शादी में बाहर थीं बाद में जब आकर देखा तो यहां पर हाल काफी खराब था। ताला बंद घर के न तो किवाड़ सुरक्षित थे और नही घर का कोई भी समान सुरक्षित बचा था। सभी कुछ आग में जल कर खाक हो चुका था। राहत के नाम पर सरकार ने उन्हें एक हजार रुपयों के अलावा दो कुन्टल गेंहू, तीन कुंटल चावल के साथ ही एक साड़ी, एक कंबल व एक गमछा व एक तिरपाल दी है। उन्होंने लेखपाल पर आरोप लगाया कि जिसने भी उसे खुश किया उनको तो पांच हजार दिला दिया पर जो खुश करने में नाकाम रहे उसे पांच हजार नही दिलाये।

बालिका के सवालों से चकराये अधिकारी

Jul 02, 10:33 pm
चित्रकूट। जहां एक तरफ गांव वाले एडीजी और डीजी पीएसी के सामने कुछ भी बोलने से डर रहे थे वहीं एक लड़की ने अपने सवालों से पुलिस अधिकारियों के मुंह बंद कर दिये।
अपने ननिहाल जमौली आयी लुधियाना की रहने वाली राधा ने सीधे डीजी पीएसी पीपीएस सिद्धू व एडीजी कानून व्यवस्था बृजलाल के सामने पहुंचकर गांव के हालात के बारे में जानकारी देकर कहा कि गांव में डाकू घुस आया। पुलिस ने उसे मारने के लिए पूरा गांव जला दिया अब राहत के नाम पर क्यों कन्नी काटी जा रही है। जितना भी सामान जला उसका पूरा मुआवजा देने के साथ ही डाकुओं के संरक्षणदाता के नाम पर ग्रामीणों को परेशान न किया जाये। उसके पूछे जाने वाले तीखे सवालों से पुलिस के दोनो शीर्षस्थ अधिकारियों के साथ ही एसपी और एएसपी भी सकते में आ गये। दोनों अधिकारियों से बार-बार बालिका के सवाल पूछे जाने पर उनके पास केवल एक उत्तर था कि राहत का मामला उनका नहीं है। इसके लिए जिला प्रशासन ही कुछ कर सकेगा। बालिका का तर्क था कि आग पुलिस ने लगाई है तो राहत के लिए उन्हें ही प्रयास करना चाहिये। काफी देर बाद उसके साथ आयी गांव की राजबेटी, तारा देवी, मेड़िया देवी, रामवती आदि ने लोगों का हस्ताक्षर युक्त पत्र पुलिस अधीक्षक को सौंपा। पत्र में गुहार लगायी है कि दस्यु को संरक्षण देने के नाम पर ग्रामीणों को बेवजह परेशान न किया जाये।

दीवारें कच्ची होने से लंबी चली नान से मुठभेड़

Jul 02, 10:32 pm
चित्रकूट। डाकू घनश्याम केवट से 51 घंटे मुठभेड़ के कारण जानने कभी यहां एसपी रहे डीजी पीएसी पीपीएस सिद्धू को लेकर एडीजी बृजलाल जमौली गांव पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने गांव की हर उस जगह को देखा, जहां दस्यु नान ने पुलिस से मोर्चा लिया था। डीजी पीएसी ने खुद कई स्थानों की फोटोग्राफी भी की।
डीजी पीएसी ने गांव भ्रमण के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वे यहां पर सबक लेने आये हैं कि कभी इस तरह की समस्या दोबारा उत्पन्न हो जाए तो उससे निपटने के लिए सुरक्षित रणनीति क्या हो। गांव की भौगोलिक परिस्थिति को देखकर कहा कि मिट्टी की दीवारों में गोली प्रभावी ढंग से काम नही कर सकती थी और खपरैल के मकानों में आग ने भी डाकू को ज्यादा क्षति नही पहुंचाई। इसके कारण ही इस डाकू को मारने में ज्यादा समय लगा। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं में स्थानीय पुलिस ज्यादा प्रभावी ढंग से काम करती है। यह पूछे जाने पर कि जब डाकू छत से कूदकर भाग रहा था तो गोली क्यों नहीं चलायी गई तो उनका जवाब था कि गोली से क्रॉस फायरिंग में हमारे ही जवान या फिर किसी निर्दोष की जान जा सकती थी। उन्होंने डाकू घनश्याम को मारे जाने के पीछे सामूहिक प्रयास की बात पर बल देते हुये कहा कि यह बात और है कि बाद में उसे हमारे कुछ जवानों ने मार गिराया पर इस ऑपरेशन में लगे सभी लोग बधाई के पात्र हैं। घायल सिपाहियों को सहायता राशि दिये जाने की बाबत एडीजी बृजलाल ने कहा कि सात घायलों को तीन-तीन लाख व एक आंशिक घायल को पचास हजार रुपये दिये जाने की जानकारी उन्हें है। उन्होंने दस्यु प्रभावित जिलों में पुलिस के पास संसाधनों की कमी पर बताया कि इस प्रकार के हर जिले में अच्छी मात्रा में पीएसी दी गई है। पुलिस के पास भी पर्याप्त मात्रा में संसाधन हैं। दोनों ने इसके बाद गांव व मुख्यालय के डाक बंगले में अपने अधीनस्थ कर्मियों के साथ बैठक कर आवश्यक निर्देश दिये। साथ ही यहां की भौगोलिक परिस्थितियों के बारे में पूरी जानकारी कर डाकुओं के सफाये की रणनीति में आवश्यक फेरबदल भी किये। एसपी राकेश प्रधान, एएसपी जुगुलकिशोर के साथ एसओजी के जवान मौजूद रहे।