मंगलवार, 23 जून 2009

पीडि़तों को प्रशासन ने राहत दी

Jun 23, 11:37 am
चित्रकूट। डाकू घनश्याम के कारण आग की तपिश से झुलसने वाले जमौली गांव के पीडि़तों को राहत देने का काम प्रशासन के साथ ही रेडक्रास सोसायटी ने किया। जिलाधिकारी ह्देश कुमार के साथ ही सदर विधायक दिनेश मिश्र ने पहुंचकर गांव वालों को जहां एक तरफ मानसिक रुप से मजबूत होने का संदेश दिया वहीं दोबारा अपनी पुरानी जिंदगी पाने के लिये आर्थिक सहायता भी प्रदान की।
आग की लपटों से झुलसे राजस्व कर्मचारियों द्वारा चिन्हित 57 घरों के लोगों को पहली किस्त के रूप में इंदिरा आवास के तहत गृह निर्माण के लिये 26200 रुपये दिये गये। यहां बताया गया कि घरों ंकी जब छत पड़ने का नम्बर आयेगा तो उन्हें 8800 रुपया और दिया जायेगा। इसके साथ ही इन्हीं परिवारों के लिये बर्तन व कपड़ा खरीदने के लिये 5000 रुपये का चेक प्रदान किया गया साथ ही 1000 रुपया पशुओं के चारे के लिये भी दिया गया। इसी अवसर पर जिला रेडक्रास सोसायटी द्वारा एक साड़ी, एक लुंगी और एक कम्बल का वितरण किया गया। जिला मुख्य चिकित्साधिकारी ने भी अपने विभाग की ओर से प्रत्येक परिवार को एक-एक हजार रुपया नकद सहायता राशि दी।
यही पर जमौली गांव में नरेगा के अंतर्गत होने वाले विकास कार्यो के लिये पहली किस्त के रुप में 5.70 हजार का चेक भदेदू प्रधान शिवकलिया को
सौंपा गया। इस योजना के तहत पीडि़त प्रत्येक परिवार के एक व्यक्ति का जाब कार्ड बनाया गया। वैसे विकास कार्यो को 19 जून से प्रारंभ हो चुके हैं। इसके मुख्य काम जमौली गांव के लिये सम्पर्क मार्ग, गांव के अंदर गलियों में खडंजा एवं सीसी रोड़ व नाली के साथ ही तालाब का निर्माण कराया जायेगा।
इसके साथ ही पीडि़त परिवारों के भरण पोषण के लिये 3 कुंटल चावल व 2 कुंटल गेहूं का भी वितरण किया गया।
वैसे इस गांव में 17 जून से ही विस्थापित ग्राम वासियों को तहसील स्तर पर ही निशुल्क भोजन की व्यवस्था कराई जा रही है। उन्हें तीन समय का भोजन दिया जा रहा है। इसके पूर्व जिला रेडक्रास सोसायटी की तरफ से 540 फिट तिरपाल का वितरण किया जा चुका है।
इस अवसर पर सीडीओ पीसी श्रीवास्तव, एसडीएम ह्षीकेश भास्कर यशोद, तहसीलदार अश्विनी कुमार श्रीवास्तव आदि अधिकारी मौजूद रहे।
नही मिल सकी इन्हें राहत
इनके घर तो जल गये पर ये गांव में नही रहते। सूखे की विभीषिका और कम आमदनी में पेट न भरने के कारण बाहर चला जाना इन्हें मंहगा पड़ गया। राजस्व कर्मचारियों ने अपनी बनाई लिस्ट में इनके मकान जलने के बाद भी जगह नही दी। राजेश पुत्र जगन्नाथ गांव में पेट न भरने के कारण प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रिक्शा चलाता है व राजेन्द्र कुमार पुत्र जगन्नाथ दिल्ली में रहकर दिहाड़ी मजदूर हैं पर दोनो का नाम लिस्ट से गायब था। लिहाजा ये सहायता पाने से वंचित रह गये। इसके साथ ही बारह नाम ऐसे हैं जिनके मकान गांव में हैं और वे आग लगने के दौरान गांव से बाहर थे। इनका भी सब कुछ आग से राख हो गया पर लेखपाल की कृपादृष्टि इन पर नही पड़ी। गजोधर पुत्र जगमोहन, काशी प्रसाद पुत्र प्रभुदयाल, राजू पुत्र राम प्रसाद, मोती लाल पुत्र बोदा, भालेन्द्र पुत्र गया प्रसाद, दुजिया पत्नी धर्मपाल, राजकुमार पुत्र राम प्रसाद, दिनेश कुमार पुत्र राम प्रसाद, रमेश कुमार पुत्र ज्ञान पाल ने बताया कि वे लोग गांव में ही रहकर मजदूरी करते हैं, पर लेखपाल ने उनका नाम पीडि़तों की लिस्ट में नही दिया। जबकि उनके मकान भी पूरी तौर पर जल गये हैं। सोमवार को भी वे अपने प्रार्थना पत्र लिये टहलते रहे पर राजस्व कर्मियों ने उन्हें बैंरग वापस भेजने के साथ ही मुख्य सभा स्थल से दूर ही रखा।

न कोई बंकर और न था कहीं घोड़ा

Jun 23, 11:37 am
चित्रकूट। डाकू घनश्याम केवट के कारण चर्चा में आये जमौली गांव के लोग आज भी आंख में आंसू लिये हर एक से सवाल पूछते हैं कि भइया हमारा कसूर क्या है। बच्चे के जन्म में खुशियां मनाना गलत होता है क्या। अब जब बीहड़ में रहेंगे तो हमारे लिए डाकू क्या और पुलिस क्या, जो भी बंदूक के जोर पर खाना मांगेगा उसे तो देना ही पड़ेगा। अब ऐसे में डाकू का शरणदाता बता उत्पीड़न का भय दिखाया जाना तो गलत ही है।
जमौली गांव के श्याम सुन्दर, राम राज, फूलचंद्र, जगन्नाथ, रामजस , महेश, बाबू लाल, भैंरोदीन व महावीर आदि दर्जनों लोग कहते हैं कि गांव में कोहराम मचा था। डाकू को निकालने के लिए उनकी आंखों के सामने पूरा गांव जला दिया गया और अब यह बदनामी कि गांव वाले डाकू को शरण देते थे। उन्होंने बताया कि गांव के मकान अन्य गांवों जैसे ही साधारण बने हैं। एक दूसरे मकान से न कोई मकान जुड़ा है और न ही किसी मकान के अंदर गड्ढा या बंकर है। उन्होंने बताया कि गांव के लोगों को जातिगत कारणों से डाकू को पनाह देना भी गलत है। गांव के मकानों के अंदर बंकर और डाकू के भागने के स्थान से कुछ दूरी पर घोड़ा होने की बात को तो पुलिस उपाधीक्षक नगर आलोक जायसवाल ने भी सिरे से नकार दिया। कहा कि चंबल के डाकुओं के पास कभी घोड़े हुआ करते थे। फिर डाकू घनश्याम का पारिवारिक ऐसा परिवेश भी नही है कि उसके पास कभी घोड़ा रहा हो तो फिर उसकी सहायता करने के लिए घोड़ा कहां से आया। उधर मुठभेड़ के समय किसकी हिम्मत थी कि वह अपनी जान जोखिम में डाल डाकू की मदद करने आयेगा। एसटीएफ के दर्जनों जवान जिन्होंने लगातार तीस घंटों तक दस्यु नान को मारने के लिए अथक परिश्रम किया बताते हैं कि न तो डाकू के मरने के बाद कोई मोबाइल मिला और न ही सर्विलांस पर ऐसा कुछ देखा गया। बंकर, घोड़ा और मोबाइल का उपयोग करने वाली बातें गलत हैं।

रविवार, 21 जून 2009

..तो अब उसका नाम बरबादी हो गया

Jun 21, 02:45 am
चित्रकूट। एक डाकू ने गांव में घुसकर कुछ ऐसा कर डाला कि अब उस छोटे से बच्चे का नाम लोग 'बरबादी' कहने लगे हैं। गांव के लोग कहते हैं कि राजकरन का पुत्र गांव की बरबादी लेकर आया, न उसके पैदा होने में नौटंकी होती और न वह पूरे गांव वालों की नौटकी करवाता। इसके साथ ही डाकू को संरक्षण देने का आरोप लगने पर बदनामी हो रही है सो अलग।
डाकू घनश्याम ने जिस अंतिम घर से पुलिस से लगभग छत्तीस घंटों तक मुकाबला किया और एक जवान को शहीद कर दिया उस घर के रहने वाले भालेन्द्र निषाद बताते हैं कि गांव में न तो किसी से उसकी रिश्तेदारी थी और न ही किसी ने कभी उसे शरण देने के बारे में सोचा भी। डकैतों को शरण देकर कौन आफत मोल लेना चाहेगा। इस हादसे में उसकी खुद मोटर साइकिल भी जल गयी। कच्चे घरों के कई कमरे भी जल गये।
बताया कि सोमवार की रात 3 बजे नौटंकी की आवाज सुनकर डाकू नान गांव में आया और आते ही उसने एक फायर किया। फायर की सुनकर नौटंकी बंद हो गयी और लोग भाग गये। फिर उसने नौटंकी चालू करने के लिये कहा। सुबह लगभग 4.30 पर वह राम प्रसाद के घर में घुस गया और घमकी दिया कि किसी को बताया तो परिवार सहित गोली मार देगा। सुबह 8.30 पर राम प्रसाद के लड़के राजू ने राजापुर पुलिस को उसके घर में घुसने की खबर दे दी। सबसे पहले गांव में टीम तीन मोटर साइकिलों पर एसओजी की आई और उसमें पूरे गांव में जाकर पोजिशन ले ली। इसी समय पुलिस की जीपों में भरकर भी जवान आये और घरों की तलाशी लेने लगे। तभी राम प्रसाद की पत्नी ने पुलिस को सही कमरे का पता बताया कि उस कमरे में भूसा रखा है और जैसे ही एसओजी के शमीम सिपाही ने उस कमरे में झांका डाकू ने सीधे उस पर गोली चला दी। वह वहीं पर गिर पड़ा। इसके साथ ही पोजीशन लेने के लिये भागने वाले राजेन्द्र सिंह व दिलीप तिवारी को भी गोली मारकर घायल कर दिया। उसने कहा कि जब खुद ही राम प्रसाद के घर वालों ने डाकू होने की सूचना पुलिस को दी तो पूरा गांव या वे संरक्षणदाता कैसे हो सकते हैं। पहले भी गांव में डाकू शंकर केवट एक दो बार इस उम्मीद से आया था कि शायद केवट होने के कारण लोग उसकी मदद करेंगे पर सभी ने उसको देखकर किवाड़ बंद कर लिये थे। बताया कि डाकू उसके घर से भागने के बाद पुलिस व पीएसी ने उनके पूरे घर की तलाशी ली और काफी सामान के साथ पैसा भी उठा ले गयी।
बताया कि उसके भाई महावीर की शादी 9 मई को मुरइया मे होनी थी पर किन्हीं कारणों के कारण बारात वहां से वापिस आ गयी। भाई की शादी 1 जुलाई को समशाबाद में तय थी। विवाह की तैयारियों के लिये पूरा सामान रखा हुआ था सब का सब बर्बाद हो गया। इसका खामियाजा कौन देगा?

नही जला मकान तो भोजन नही

Jun 21, 02:45 am
चित्रकूट। यह तो नाइंसाफी है। हमारा घर नही जला तो क्या जब खाने पीने के सामन के साथ पैसे भी लूट लिये गये तो क्या खायें।
खाना तो केवल उन्हीं को मिल रहा है जिनके घर बचे ही नही, जबकि खाने की जरूरत तो पूरे गांव को है। एक निषाद परिवार का कुनवा इतना बढ़ा कि उसने एक छोटे से गांव की शक्ल ले ली। राजस्व विभाग के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि गांव के 57 घर पूरी तरह जल गये है। जबकि किनारे के सात मकान पूरी तरह बच गये। साथ ही 3 मकान आंशिक रूप से जले हैं। साबुत मकान बचने वाले गुलजार, राजाराम, रामन, राजकरन, गोरे, रज्जन और तेज बहादुर के लिये सरकारी इमदाद के नाम पर कुछ नही है।
पचासों जवानों के छिपने की स्थली बना रहा गुलजार का मकान तो साबुत बच गया, पर उसके कटहल के पेड़ का एक भी फल साबुत नही बचा। सब आसपास के गांव वाले व पीएसी के जवान उठा ले गये। उनकी बहू रन्नो बताती है कि पुलिस ने उन्हें संभलने का मौका ही नही दिया जैसी हालत में थे वैसे ही घर से निकल जाने का हुक्म सुना दिया। क्या करते जब घर से पैसा रुपया या सामान ही देखने का मौका नही दिया तो फिर क्या किया जाये। घर में उसके पति की जेब का पैसा साफ हो जाने की उसने बात कही। कहा कि पिछले दो दिनों से रिश्तेदारों के भरोसे ही उसका घर चल रहा है। गांव की तबाही का मंजर सुनकर गांव में आ रहे रिश्तेदार अपने साथ खाने पीने का जो सामान ला रहे हैं उसी में गुजर बसर हो रहा है।
तो अब क्या होगा..
अधिकतर ग्रामीणों को इस बात का डर सता रहा है कि अभी तो नया-नया मामला है तो सरकारी इमदाद के नाम पर भोजन मिल रहा है। खेत पर भगवान इन्द्र की कृपा न होने कारण अभी कुछ बोया नही गया। पहले का रखा सभी कुछ जल कर स्वाहा हो गया। आगे की जिंदगी लगाता है दूसरे की मजदूरी करके ही गुजारनी पड़ेगी। सबसे बड़ी दिक्कत तो बिट्टन को इस बात की है कि उसके जानवरों का क्या होगा क्योंकि अधिकतर गांव में रखा भूषा जल चुका है और उनके खाने के लिये भी कुछ नही बचा है।

यहां पर साहेब बन गये रसोइया

Jun 21, 02:45 am
चित्रकूट। डाकू घनश्याम केवट उर्फ नान केकारण बर्बाद हो चुके गांव के हर एक व्यक्ति को अब प्रशासन द्वारा दी जाने वाली रोटी और सब्जी की ही आस दिखाई देती है। ऐसा इसलिये है क्योंकि कल तक जिन्हें वे 'साहेब' कहकर आदर देते थे आज वे उनके लिए रसोइया बन गये हैं। कानूनगो, लेखपाल और सप्लाई इंसपेक्टर गांव वालों के लिए रोटी और सब्जी बना रहे हैं। पिछले चार दिनों से चल रहे राहत शिविर में आग के कारण विस्थापित हुये परिवारों को गांव के लेखपाल को तो गांव में नुकसान की गणना के लिए तैनात कर दिया गया है।
शनिवार को जब पूर्वाह्न 11 बजे जागरण की टीम गांव जमौली पहुंची तो बाहर ही बने विद्यालय प्रांगण में चूल्हे पर कानूनगो गुरु चरण पांडेय, लेखपाल नैनी राम अभिलाष त्रिपाठी, लेखपाल बिलास विश्वेश्वर दयाल शुक्ल, जमौली लेखपाल राम बाबू सिंह, लेखपाल अर्की सूरज पाल सिंह, लेखपाल खोपा सुन्दर लाल सिंह सब्जी बनाने में लगे हुए थे। पास ही बैठे नायब तहसीलदार उन्हें खाना बनाने की विधि बता रहे थे। गांव की महिलाएं आट माड़ रही थीं। राजस्व कर्मियों का खाना बनाना महिलाओं को अच्छा नहीं लगा रहा था। बात करने पर उन्होंने कहा कि कि उई तौ साहेब आय, हियां मेहेरियां मोटाई करती हैं, या नहीं कै सब जनै आकै खाना बनवावैं। लेखपाल अर्की ने बताया कि यहां दिक्कत होने के कारण भोजन व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के विभाग की है। इसलिये सबकी ड्यूटी लगा दी गई है। बताया कि पिछले चार दिनों में दो दिन तो जिलाधिकारी स्वयं ही पूरे समय रहे। जबकि एसडीएम और तहसीलदार भी लगातार ही यहां पर दिन में दो से तीन बार आ जाते हैं। यहां खाना बनते ही बच्चे खाने पर टूट पड़ते हैं। सप्लाई इंसपेक्टर शिव प्रसाद शर्मा ने बताया कि उनके पास अभी पांच छह दिनों का राशन उनके पास है। आगे की व्यवस्था जिलाधिकारी के आदेश पर कर दी जायेगी।

प्रशासन के काम से खुश हैं नेता

Jun 21, 02:45 am
चित्रकूट। जहां एक तरफ प्रशासन के आला अधिकारी डाकू घनश्याम उर्फ नान के कारण बदहाली की कगार पर पहुंच चुके गांव जमौली के लिये राहत कार्य शुरू कर ग्रामीणों को लाभ पहुंचाना शुरू कर दिया है। वहीं शनिवार को
सदर विधायक दिनेश मिश्र ने गांव में पहुंचकर हालातों का जायजा लिया। भुक्त भोगियों से मिलकर हर तरह की सरकारी सहायता दिलाने का आश्वासन दिया। इसके साथ ही मानववादी पार्टी की 'बुंदेलखंड' प्रदेश अध्यक्ष रेखा निषाद ने कहा कि डाकू घनश्याम को तो शासन प्रशासन ने मार गिराया पर गांव में जले हुये मकानों व बमों के कारण पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं इसका जिम्मेदार तो ग्रामीण कतई नही है। भोजन सामग्री के साथ ही जानवरों का भूसा व कपड़े लत्ते भी जल गये। प्रशासन इन सब चीजों की राहत देने के साथ ही ग्रामीणों के दिलों से खौफ को भी दूर करने का प्रयास करे।
उन्होंने कहा कि अभी किसी ग्रामीण को जाति के नाम पर पुलिस डाकू का संरक्षण दाता बनाकर दूसरा डाकू न पैदा कर दे इसके लिये खुद पुलिस को उनको विश्वास में लेकर काम करना होगा। कहा कि प्रशासन भोजन, पानी, दवा, कपड़े की व्यवस्था करे अन्यथा उन्हें सड़क पर भीख मांगकर यह व्यवस्था करनी पड़ेगी।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष दुर्गा भाई निषाद के साथ वह पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ रविवार को गांव में जाकर उजड़े हुये लोगों की लिस्ट तैयार करेंगी व उसकी जानकारी प्रशासन को देकर बतायेंगी कि ग्रामीणों को किस चीज की आवश्यकता सबसे ज्यादा है। शासन प्रशासन न अगर इसमें लापरवाही बरती तो मानववादी पार्टी आंदोलन शुरु करने में नही हिचकिचायेगी।
इसके साथ ही भाजपा नेता देव त्रिपाठी व पंकज अग्रवाल ने पुलिस और डाकू के बीच चल रहे संघर्ष के समय से ही जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को राहत मुहैया कराने की प्रशंसा करते हुये कहा कि जहां एक तरफ डाकू को मारकर पुलिस बधाई की पात्र है, वहीं जिलाधिकारी के साथ एसडीएम व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों का जान पर खेलकर मौके पर रहना तारीफे काबिल है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की मदद भी काबिलेगौर है। उनकी दी जा रही सहायता से बर्बाद हुये गांव वाले जल्द ही अपनी पुरानी जिंदगी में वापस आ जायेंगे।

शादी नहीं अभी पढ़ना चाहतीं जमौली की लड़कियां

Jun 21, 02:45 am
चित्रकूट। अब कैसे होगी इनकी शादी। यह एक ऐसा सवाल है जो हर एक जमौली के उस पिता के जेहन में कौंध रहा है जिसकी बेटी विवाह के लायक है। लोग सीधे तौर पर ही कहते हैं कि भइया हमसे कौन सा ऐसा अपराध हुआ कि हमारे गांव को डाकुओं का संरक्षणदाता मान लिया गया। इस बदनामी से अब कौन हमारी बेटियों से शादी करेगा।
श्याम सुंदर, राम राज, फूल चंद्र, जगन्नाथ, राम जस, महेश, बाबू लाल, भैरो दीन व महावीर वे पिता हैं जिनकी पुत्रियां विवाह के योग्य हैं। इनमें भी कुछ इस तरह की बेटियां हैं जिन्होंने गांव के दर्दीले जीवन से इतर इंटर तक की परीक्षा पास कर ली है। वैसे गांव में कक्षा पांच के बाद का कोई भी विद्यालय नहीं है। जगन्नाथ की बेटी राजाबेटी ने इसी वर्ष इंटर की पढ़ाई कौशाम्बी से पूरी की है। राम राज की बेटी किरन ने भी इंटर पास किया है। पार्वती ने हाई स्कूल किया है तो किरन भी कक्षा 11 पास कर चुकी है। गांव में विद्यालय न होने का दुख इन्हें नही बल्कि अब इन्हें डाकुओं के पोषक गांव के रूप में पुकारे जाने का दुख है। सरोज, गोमती, रानी और चंदा ने कहा कि वे आगे पढ़ लिख कर गांव का नाम रोशन करेंगी जिससे गांव के चेहरे पर लगा कलंक मिट सके। उन्होंने कहा कि उनके लिए विवाह नहीं बल्कि पढ़ाई ज्यादा जरुरी है।

जिलाधिकारी ने जरौली का कायाकल्प किये जाने का किया वादा

Jun 21, 02:45 am
चित्रकूट। जमौली गांव में दस्यु घनश्याम उर्फ नान केवट के कारण बर्बाद हुये गांव की तस्वीर एक बार फिर से संवारने का काम प्रशासन ने शुरु कर दिया है। शनिवार की दोपहर जिलाधिकारी ह्देश कुमार ने गांव में पहुंच कर आग से पीडि़त 57 परिवारों को 15-15 मीटर की तिरपाल आग उगल रहे सूर्य देव से बचने के लिये फौरी राहत के लिये दी।
इसके साथ ही उन्होंने गांव की तस्वीर एक बार फिर पहले से अच्छी बनाने के लिये गांव के 19 बीपीएल परिवारों को इन्द्रा आवास बनाने के आदेश के साथ ही 138 और भी परिवारों को इंद्रा आवास के लिये शासन को संस्तुति भेजने की बात बताई। इसके अलावा प्रत्येक पीडि़त परिवार को पांच-पांच कुंटल अनाज भी दिये जाने की बात कही।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा नरेगा के तहत ग्यारह लाख रुपया गांव के विकास के लिये रिलीज कर दिया गया है। इससे गांव में नाली, खड़ंजा व सड़के तो बनेगी ही और पीडि़त परिवारों को कम से कम तीन महीनों का रोजगार भी एक मुश्त मिलेगा। इसके साथ ही भोजन के लिये फौरी सहायता के रूप में कपड़े व बर्तनों के लिये पांच- पांच हजार रुपये व जानवरों की भूसा की व्यवस्था के लिये एक हजार रुपये दिये जा रहे हैं। जिलाधिकारी के साथ एसडीएम ह्षिकेश भास्कर यशोद व तहसीलदार अश्विनी कुमार श्रीवास्तव भी थे।

जमौली में हर तरफ तबाही का मंजर

Jun 20, 01:52 am
चित्रकूट। डाकू घनश्याम उर्फ नान के जमौली गांव में मारे जाने के चौबीस घंटों बाद भी चारों ओर सन्नाटा है। सिद्दू की पत्नी दयावती, लखन की पत्नी कला और देशराज के बच्चे गोलू, पुनीत की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। उनका दुख तो उनके आशियानों के उजड़ जाने के साथ तपती धूप में सिर छिपाने की भी जगह न होने को लेकर है। फिलहाल प्रशासन ने गांव के स्कूल में ग्रामीणों के रहने की व्यवस्था तो की है, पर डर के बाद वापस लौटे लगभग सौ लोगों के लिए वह स्थान काफी कम है।
गांव के रामप्रसाद, लखन, बबली और रामदयाल का कहना है कि भइया गांव में राजकरन के लड़के का बरहौं मनाना तो महंगा पड़ गया। कार्यक्रम में डाकू बंदूक लेकर आ गया तो डर के मारे कोई कुछ नहीं बोल सका। गांव के सारे कच्चे मकान व सामान तो जल ही गये और पक्के मकान भी रहने लायक नही बचे। इतनी गोलियां और बम के साथ कई बार आग लगने से पक्के मकान तक लटक गये और अभी तक घरों के अंदर जाने की हिम्मत आंच की झुलस के कारण नहीं हो रही है। गांव के ही कैलाश ने कहा कि अभी तो मकान दोबारा बनने और वापस बनने में काफी समय लग जायेगा। उसके किसान विकासपत्र व काफी पैसों के साथ ही साल भर के लिए इकट्ठा किया हुआ अनाज व भूसा भी जल गया है। उसने कहा कि पूरे गांव की यही कहानी है। न तो किसी के पास कपड़े बचे हैं और न ही किसी के पास खाने पीने का सामान। अब ऐसे में उसने आगे की जिंदगी काफी मुश्किल से चलना बतायी। वैसे गांव में जिलाधिकारी ह्देश कुमार ने गुरुवार से ही एसडीएम के जरिये तहसीलदार अश्विनी कुमार व नायब तहसीलदार को कैंप लगाकर ग्रामीणों को खाना खिलाने का निर्देश दिया था। इसके पहले एसडीएम हृषिकेश भास्कर यशोद ने मुठभेड़ के समय मंगलवार, बुधवार व गुरुवार को ग्रामीणों को ढूंढ-ढूंढ कर खाने पीने की व्यवस्था की थी। यही व्यवस्था आज भी जारी रही। गांव में कैंप कर रहे तहसीलदार अश्विनी कुमार ने बताया कि पहले तो डर के मारे ग्रामीण सामने नही आ रहे थे, पर अब ग्रामीण सामने आ रहे है। शुक्रवार को लगभग सौ ग्रामीणों ने सुबह के समय रोटी दाल सब्जी, दोपहर में लाई व बिस्कुट व शाम के समय पूड़ी व सब्जी खायी है। बताया कि इस मुठभेड़ में गांव के 57 मकान पूरी तरह नष्ट हो गये हैं व 3 आंशिक रूप से जले हैं। इसके साथ गांव में मौजूद पक्के मकान भी रहने लायक नहीं बचे है। सर्वे करके जिलाधिकारी को रिपोर्ट शुक्रवार रात सौंपी जा रही है। आगे की राहत के बारे में शनिवार को ही मालूम चल सकेगा।

नान मारा गया लेकिन सवाल अभी बाकी

Jun 20, 01:52 am
चित्रकूट। एक डकैत, पांच सौ प्रशिक्षित जवान, 51 घंटे मुठभेड़, दस घायल और चार जवानों की शहादत। फिर भी डकैत की मौत के बाद उप्र पुलिस खुद की पीठ क्या सोंचकर थपथपा रही है यह बात समझ से परे है। डाकू नान से हुई मुठभेड़ कई अनुत्तरित प्रश्न अपने पीछे छोड़ गयी है जिसका जवाब दे पाना प्रदेश पुलिस के आला अफसरों के लिए शायद बेहद मुश्किल होगा क्योंकि डकैत तो मारा गया लेकिन सवाल अभी बाकी हैं। स्थानीय पुलिस की अपराधों के आगे घुटने टेक देने और अपराधियों से सांठ-गांठ की प्रवृत्ति ने इस क्षेत्र में डकैतों की लंबी विषबेल तैयार कर दी जो दुर्दात डकैतों के मारे जाने के बाद भी लगातार फलती-फूलती रही।
बिना किसी तैयारी और रणनीति के लगातार 51 घंटों तक एक अदने से डाकू ने जिस तरह से साधन संपन्न भारी भरकम पुलिस फोर्स को दांतों तले चने चबवा डाले उससे पूरे पुलिस महकमे पर उंगली उठना स्वाभाविक है। लोगों को शुक्र मनाना चाहिए एसटीएफ का जिसने दुर्दात डकैत ददुआ और ठोकिया को मार कर अमन-चैन से रहने का मौका दिया वहीं डाकू खड्ग सिंह व गौरी यादव को जेल के सींकचों के पीछे पहुंचा दिया। जिला पुलिस की कार्यशैली से दबंग और डकैत तो नहीं लेकिन आम जनमानस जरूर दहशत में हैं जहां थाने और चौकियां तक बिकने के आरोप लगते रहे हैं। समाज विरोधी तत्वों के सिर्फ इस जिले में बहाव की बात करें तो ऐसा कोई जरायम का पन्ना नही जिसके अध्याय यहां पर लिखे न जाते हों। विश्व प्रसिद्ध धार्मिक आस्था के इस केंद्र में कच्ची शराब, स्मैक और गांजा तो बिकता ही है और अंग्रेजी शराब हर लाज व होटल के पास आसानी से अतिरिक्त दाम चुका कर मिल जाती है। नव धनाढ्य वर्ग के लिए यहां होटलों में हर एक 'वस्तु' आसानी से सुलभ है। इस चौकी में कमाई का सबसे बड़ा श्रोत डग्गामारी है। इसके साथ ही प्रत्येक अमावस्या में बाहर से आने वाले गिरहकट भी पुलिस को पूरा सहयोग करते हैं। वैसे पुलिस के काफी लोगों के पास खुद की गाडि़यों से डग्गामारी करवाते हैं। जिससे उन्हें मासिक शुल्क नही देना पड़ता। बड़ी अमावस्या पर तो ठेके पर बाहर से टैक्सियां व आपे चलवाने वालों में भी पुलिस विभाग से जुड़े लोगों के नाम आते रहे हैं। आय के श्रोत वाले भरतकूप, बरगढ़ मऊ व पहाड़ी राजापुर में पत्थर व बालू से पुलिस को आमदनी है तो मारकुंडी, बहिलपुरवा और मानिकपुर में लकड़ी से। इसके साथ ही रेलवे पुलिस का काम भी हमेशा से संदिग्धता की श्रेणी में रहा है। वह रेलवे का माल बचाने में कम बिना टिकट यात्रियों की चेकिंग के साथ सीटें बेचने और सामान्य यात्रियों को परेशान कर धन वसूलने में ज्यादा ध्यान देती है। इस पूरे मामले पर मा‌र्क्सवादी कम्युनिष्ट पार्टी के जिला सचिव रुद्रप्रसाद मिश्र कहते हैं कि एक भी दिन ऐसा नही जाता जब पुलिस पर आरोपित मामले उनके पास न आते हों। कई मामलों को वे कोर्ट में ले गये। जिस पर बाकायदा मुकदमा चला और कई पुलिस कर्मियों को सजा मिली। अभी भी यहां की अदालतों में कई पुलिस कर्मियों के खिलाफ मामले चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज की जिला पुलिस अपराधियों को पकड़ने में कम खुद अपराधियों को संरक्षण देने में ज्यादा रुचि रखती है। कुल मिलाकर जब तक जिले की पुलिस का चेहरा नहीं बदला जायेगा तब तक शायद यूं ही धर्मनगरी के बीहड़ों में ददुआ, ठोकिया और नान केवट पैदा होते रहेंगे और यहां की वादियां बंदूकों की गरज से गूंजती और बेकसूरों के खून से होली खेलती रहेंगी।

ठोकिया की तरह ही दस्यु नान ने उठायी थी बंदूक

Jun 20, 01:52 am
चित्रकूट। क्या किसी व्यक्ति को डाकू पुलिस बनाती है या फिर गांवों का सामाजिक परिवेश। जिले के दो डाकुओं की कहानी तो एक जैसी ही दिखाई देती है। दस्यु ठोकिया और घनश्याम केवट के अपराध की दुनिया में जाने के कारणों पर गौर करें तो स्थितियां लगभग एक जैसी ही दिखायी देती हैं।
ठोकिया ने जहां अपनी बहन के साथ हुए दुष्कर्म के बाद अपराध की दुनिया का रुख किया तो अनपढ़ नान केवट ने भतीजी के साथ हुई छेड़छाड़ और सामाजिक रूप से अपमानित होने के बाद बंदूक उठायी। वैसे दोनो की कहानी का एक पहलू पुलिस और गांव की पंचायत रही। ठोकिया की बहन के साथ दुष्कर्म के आरोपी के शादी न करने और मामला पुलिस में जाने के बाद भी न्याय नहीं मिला तो उसने कानून को हाथ में ले लिया। वहीं डाकू घनश्याम की भतीजी के साथ जब गांव के एक युवक ने पानी भरते समय छेड़छाड़ की तो दबंगों ने शिकायत करने पर पहले उसे ही पीट दिया। जब वह पुलिस के पास पहुंचा तो पुलिस ने उसे ही भगा दिया। डाकू घनश्याम की पत्नी बताती है कि परचून की दुकान चलाने वाले उसके पति को दबंगों ने कई बार बेइज्जत भी किया। दुकान में उसका बैठना दूभर हो गया था। काफी परेशान हालत में उसने अपराध की दुनिया का रुख गांव के दबंग को पीटकर किया।

गांव वालेन के जुलुम से डाकू बन गा

Jun 20, 01:52 am
चित्रकूट। समय बड़ा बलवान होता है। कभी डाकू घनश्याम की पत्नी होने की हनक रखने वाली उर्मिला का साथ देने के लिए आज कोई तैयार नहीं। उर्मिला से जब जागरण ने बातचीत की तो उसका दर्द आंसुओं के सैलाब के रूप में सामने आ गया। कहा कि 'भइया मोर आदमी गांव वालेन के जुलुम से डाकू बन गा, डाकू बनै के बाद वा हमैं भूलिगा, पै मैं ओहेके मेहेरिया आहूं, मैं वही कै लाश का पूरा संस्कार करवाईहौं।'
खुद मजदूरी कर अपने बच्चों का पेट भरने व खानाबदोश सी जिंदगी बिताने का दावा करने वाली पचास हजार के इनामी घनश्याम की पत्नी उर्मिला ने शव विच्छेदन गृह के पास जागरण से बातचीत में खुलासा किया कि उसकी किसी बहन की शादी जमौली में नही हुई थी। न ही उसकी किसी भी प्रकार की रिश्तेदारी जमौली में है।
उसका पति जब से डकैत हो गया था तक से वह चार-पांच बार ही उससे मिली थी, वह भी जंगल में। वह घर कभी नहीं आया। कहा कि उसके पति ने कभी उसकी पैसे से कोई मदद नही की और न ही बच्चों के बारे में कोई जानकारी की। उसने कहा कि आज की तारीख में न तो उसके मां बाप जीवित हैं और न ही सास ससुर। यहां तक की जिस भाई की लड़की के कारण उसका पति बागी हुआ उसके परिवार ने भी साथ छोड़ दिया।
पत्नी ने बताया कि उसका विवाह नान के साथ लगभग बीस वर्ष पहले हुआ था। तीन पुत्रियों में सबसे बड़ी सरोजा की शादी रिश्तेदारों से भीख मांगकर किसी प्रकार कर दी। उसके पति ने न तो पुत्री के विवाह में और न ही और कभी एक रुपये की भी मदद की। घर तो पुलिस पहले ही गिरा चुकी थी। अब तो उसका व उसके बच्चों का जीवन खानाबदोशों सा ही है।

आखिर यह चेहरा है जिला पुलिस का

Jun 20, 01:52 am
चित्रकूट। अपने को सबसे ज्यादा चुस्त-दुरुस्त मानने वाली यूपी पुलिस को उसका असली चेहरा दिखाने का काम एक अदने से डाकू ने कर दिखाया। वह बिना किसी तैयारी और रणनीति के लगातार 51 घंटों तक पुलिस के जाबांजों को असली मुठभेड़ का पाठ पढ़ाता रहा। इसको लेकर यहां के लोग यह कहने में कतई गुरेज नहीं कर रहे कि पांच सौ जवानों पर एक दस्यु भारी पड़ गया।
जिले में समाज विरोधी तत्वों की बात करें तो ऐसा कोई जरायम का पन्ना नही जिसके अध्याय यहां पर लिखे न जाते हों। धार्मिक आस्था के इस केंद्र में कच्ची शराब, स्मैक और गांजा बिकता है। नव धनाड्य वर्ग के लिए यहां पर पवित्रता का बोध कराने वाले होटलों में हर एक 'वस्तु' आसानी से सुलभ है। इस चौकी में कमाई का सबसे बड़ा श्रोत डग्गामारी करने वाली टैक्सियां व जीपें हैं। इसके साथ ही प्रत्येक अमावस्या में बाहर से आने वाले गिरहकट भी पुलिस को पूरा सहयोग करते हैं। वैसे पुलिस के काफी लोगों के पास खुद की गाडि़यों से डग्गामारी करवाते हैं। जिससे उन्हें मासिक शुल्क नही देना पड़ता। बड़ी अमावस्याओं पर तो ठेके पर बाहर से टैक्सियां व आपे लाकर तमाम चौकी इंचार्ज और एस पी आफिस से जुडे़ लोग चलवाते देखे गये हैं। आय के श्रोत वाले भरतकूप, बरगढ़ मऊ व पहाड़ी राजापुर में पत्थर व बालू से पुलिस को आमदनी है तो मारकुंडी, बहिलपुरवा और मानिकपुर में लकड़ी से। इसके साथ ही रेलवे पुलिस का काम भी हमेशा से संदिग्धता की श्रेणी में रहा है। वह रेलवे का माल बचाने में कम बिना टिकट यात्रियों की चेंकिग के साथ सीटें बेचने और सामान्य यात्रियों को परेशान कर धन वसूलने में आगे रही है।
इस पूरे मामले पर मा‌र्क्सवादी कम्युनिष्ट पार्टी के जिला सचिव रुद्र प्रसाद मिश्र कहते हैं कि एक भी दिन ऐसा नही जाता जब पुलिस पर आरोपित मामले उनके पास न आते हों। कई मामलों को वे कोर्ट में ले गये। जिस पर बकायदा मुकदमा चला और कई पुलिस कर्मियों को सजा मिली। अभी भी यहां की अदालतों में कई पुलिस कर्मियों के खिलाफ मामले चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज की जिला पुलिस अपराधियों को पकड़ने में कम खुद अपराधियों को संरक्षण देने में ज्यादा रुचि रखती है। अधिकारी तो सत्ता पक्ष के नेताओं से नजदीकी बढ़ाने के चक्कर में कभी प्रमोशन तो कभी डिमोशन पाते ही रहते हैं। यही हाल छोटे कर्मचारियों के भी हैं। अधिकतर पुलिसकर्मियों को सत्ता पक्ष के नेताओं की चरण वंदगी करते देखा जा सकता है।

कड़ी सुरक्षा में हुआ दस्यु नान का अंतिम संस्कार

Jun 20, 01:52 am
चित्रकूट। पुलिस मुठभेड़ में मारे गये डाकू घनश्याम केवट का अंतिम संस्कार शुक्रवार मंदाकिनी किनारे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच किया गया। वैसे प्रदेश की पुलिस से 51 घंटों तक लोहा लेने वाले डाकू नान की लाश को 28 घंटे पोस्टमार्टम के लिए भी इंतजार करना पड़ा। शाम पांच बजे के बाद उसकी पत्नी उर्मिला को शव सौंप मंदाकिनी किनारे अंतिम संस्कार करवा दिया गया।
वैसे उर्मिला अपने पति का शव लेने के लिए कल देर रात से ही मुख्यालय में अपने चचेरे देवर मूल चंद्र व भाई शिव नाथ के साथ डेरा डाले हुई थी पर पुलिस के भय से वह सामने नहीं आ रही थी। दोपहर के बाद मानववादी पार्टी के अध्यक्ष दुर्गा निषाद, डाकू शंकर की पत्नी रेखा निषाद व पार्टी के लोकसभा प्रत्याशी बालेन्द्र निषाद के यहां पर आने के बाद उसका ढांढ़स बंधा और पुलिस भी उसे उसके पति का अंतिम संस्कार करवाने को राजी हो गयी। अंतिम संस्कार के बाद दुर्गा निषाद ने पत्रकारों से बताया कि डाकू घनश्याम डकैत था। उसे उसके किये की सजा मिल गई। जमौली गांव के सभी लोग डाकुओं के पोषक नही हैं। उनके मकान जल गये हैं। प्रशासन को फौरी तौर पर तुरन्त ही उनके लिये मकानों की व्यवस्था के साथ ही घर का अन्य समान के साथ ही रोजगार के अन्य अवसर भी उपलब्ध कराना चाहिये। जिससे वे जी सकें।

नान के बाद अब दस्यु रागिया की बारी : डीजीपी

Jun 20, 01:52 am
चित्रकूट। कहीं ऐसा न हो कि इस जिले के अन्य डाकू भी दस्यु घनश्याम की तर्ज पर पुलिस से सीधा मोर्चा लेने लगें, इस बात को लेकर प्रदेश पुलिस काफी संजीदा है। डाकू ठोकिया को मारने व खड़ग सिंह, गौरी यादव के साथ ही दस्यु दीपक पटेल को जेल भेजने के बाद एसटीएफ थोड़ा आराम के मूड में आ गई थी पर अब पुलिस मुखिया यहां के डाकुओं को लेकर थोड़ी भी ढील बरतने को कतई तैयार नहीं हैं।
सुरवल गांव के पुरवा माफीदार में उतरते ही डीजीपी विक्रम सिंह ने कहा कि अब अगला टारगेट पचास हजार का इनामी सुंदर पटेल उर्फ रागिया है। इसे किसी भी कीमत में उसके अंजाम तक पहुंचाना है। उन्होंने एसटीएफ के एएसपी अनंतदेव तिवारी के साथ ही मौजूद लोगों से कहा कि यहां के डाकू कुछ ज्यादा ही खतरनाक हैं।
गौरतलब है कि अभी भी ददुआ और ठोकिया गिरोह के अच्छे असलहे पुलिस को नही मिल पाये हैं। डाकू रागिया व सुदेश पटेल के साथ ही तमाम और डकैत यहां की वादियों से अपना साम्राज्य चला रहे हैं। अगर एसटीएफ के सूत्रों पर यकीन किया जाये तो डाकू रागिया उनकी पकड़ से ज्यादा दूर नहीं है पर पुलिस को चकमा देने में माहिर रागिया हमेशा एसटीएफ और पुलिस दोनों को दर्जनों बार गच्चा दे चुका है। सूत्र बताते हैं कि दिमाग का तेज व निशाने का अचूक माना जानेवाले रागिया के गिरोह में इस समय 20 से 25 सदस्य हैं। प्रदेश की सीमाएं इस गिरोह के लिए कोई मायने नहीं रखती। फिलहाल बिछियन नरसंहार के बाद यह गिरोह पूरी तरह शांत है। एसएसपी एसटीएफ अमिताभ यश ने साफ शब्दों में कहा कि उसका भी समय पूरा हो चुका है। जल्द ही उसे मार गिराया जाएगा।

शनिवार, 20 जून 2009

आधुनिक हथियारों पर भारी रही एक रायफल

Jun 19, 01:54 am
चित्रकूट। एक तीन सौ बारह बोर की रायफल और लगभग डेढ़ सौ गोलियों के साथ चार पुलिस जवानों को मारने और पूरी पुलिस को 51 घंटों तक छकाने और उनकी रणनीतियों को विफल करते रहने का माद्दा। यह उस एक अदद डकैत से यूपी पुलिस के लड़ने की कहानी है जिसने जिले से लेकर प्रदेशस्तर तक की पुलिस व्यवस्था को हिलाकर रख दिया। पिछले साल सिपाही अभय राय को मारकर पचास हजार का इनामी बनने वाला डाकू घनश्याम इतना खूंखार हो जायेगा किसी ने सोचा भी नहीं था।
सटीक मुखबिरी के सहारे मंगलवार को सुबह दस बजे जरौली गांव में पहुंचे लगभग आधा दर्जन से ज्यादा पुलिसकर्मियों में से एक की जान लेने के साथ ही दो को घायल करने के बाद तो उसने आतंक का ऐसा खेल खेला कि किसी को ऐसी उम्मीद ही नहीं थी। पुलिस की पूरी कार्रवाई देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे बैकफुट पर डाकू नान नहीं बल्कि पुलिस थी। पुलिस टीम के सबसे काबिल माने जाने वाले एडीजी को इस दस्यु को अंजाम तक पहुंचाने के लिए लगभग बाइस घंटे लग गये। पिछले तीन दिनों से आतंक के इबारत की नई परिभाषा गढ़कर सुर्खियां बटोरने वाले डाकू के आतंक और खौफ की कहानी पीएसी के जवानों के साथ ही जिला पुलिस के सिर चढ़कर बोल रही है। डाकू के दिन में बारह बजे छिपे हुए स्थान से भागने के बाद एसओजी और एसटीएफ उसके पीछे भागी और डाकू को मारने में इनकी ही टीम ने जाबांजी दिखाई और परिणाम स्वरूप गुरुवार को लगभग डेढ़ बजे डाकू नान उर्फ घनश्याम को नाले में मार दिया गया।

शुक्रवार, 19 जून 2009

मुठभेड़ जारी, दो और जवान शहीद

Jun 18, 02:07 am
चित्रकूट। राजापुर थाना क्षेत्र के जमौली गांव में दस्यु नान उर्फ घनश्याम केवट व पुलिस के बीच मंगलवार को शुरू हुई मुठभेड़ बुधवार को भी चलती रही। दूसरे दिन दस्यु नान की फायरिंग से पीएसी के कंपनी कमांडर व एक सिपाही समेत शहीद हो गये। वहीं आईजी पीएसी व डीआईजी बांदा समेत पांच लोग घायल हो गये। घायलों को हेलीकाप्टरों से लखनऊ के पीजीआई भेजा गया है। समाचार लिखे जाने तक मुठभेड़ जारी थी और अभियान की कमान एडीजी बृजलाल ने संभाल ली थी।
बताते चलें कि राजापुर के जमौली गांव में मंगलवार को दस्यु नान केवट से शुरू हुई मुठभेड़ में एसओजी का जवान शमीम शहीद हो गया था और दो सिपाही घायल हो गये थे। पुलिस द्वारा गांव को चारों ओर से घेरने के बाद रातभर रुक-रुक कर फायरिंग होती रही। बुधवार सुबह पुलिस ने नये सिरे से रणनीति बनायी। जिस घर में बदमाश रुका था उस घर में जब एसटीएफ टीम ने घुसने की कोशिश की तो अंदर से हुई फायरिंग में एसटीएफ के कमांडो अकरम व इंसपेक्टर नावेन्दु घायल हो गये। वहीं छत में पोजीशन लेकर फायरिंग कर रहे पीएसी के कंपनी कमाडर बेनी माधव सिंह शहीद हो गये। इसके थोड़ी देर बाद ही डीआईजी बांदा के गनर इकबाल को गोली लगी। उसे राजापुर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र लाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। दोपहर लगभग बारह बजे पुलिस ने उन घरों में आग लगा दी जहां बदमाश रुका था। लगभग एक घंटे तक आग लगी रही और बदमाश की ओर से फायरिंग बंद हो गयी। मौके पर मौजूद फायर बिग्रेड के जवानों ने घरों में लगी आग को बुझाया। आग बुझाने के बाद उन घरों में घुसने की योजना बनायी गयी। थोड़ी देर में दस्यु नान ने फिर फायरिंग शुरू कर दी। घटनास्थल पर जायजा लेने पहुंचे आईजी पीएसी बी के गुप्ता व डीआईजी बांदा एसके सिंह के पेट में गोली लगी। साथ ही कौशांबी के पश्चिम शरीरा के थाना प्रभारी मनोज कुमार मिश्रा के हाथ में गोली लगी। घायल आईजी, डीआईजी व दरोगा को जानकीकुंड चिकित्सालय लाकर भर्ती कराया गया। जहां प्राथमिक इलाज के बाद लखनऊ से आये हेलीकाप्टर से दोनों को लखनऊ पीजीआई भेज दिया गया। खबर लिखे जाने तक एडीजी बृजलाल भी घटनास्थल पर पहुंच गये थे। उन्होंने अब इस अभियान की कमान खुद संभाल ली थी।

अब दस्यु नान के मारे जाने का इंतजार

Jun 18, 02:07 am
चित्रकूट। दो दिनों से दस्यु नान केवट के साथ जारी मुठभेड़ में तीन जवानों के शहीद होने और आईजी व डीआईजी के घायल होने के बाद अब लोगों को इस बदमाश के मारे जाने का इंतजार है।
दो दिनों से जारी पुलिस मुठभेड़ में कुख्यात दस्यु नान केवट ने बेहद शातिराना अंदाज में पुलिस पर हमले किये हैं। हमले में घायल एसटीएफ के कमांडो अकरम ने जानकीकुंड अस्पताल में बताया कि वह दस्यु नान के सामने पहुंच गया था और जैसे ही फायर करने के लिए उसने अपनी एके 47 उठाई वैसे ही दस्यु ने फायर झोंक दिया। गोली उनके कंधे में धंस गयी। कुछ यही हाल घायल कौशांबी जिले के पश्चिम सरीरा के थानाध्यक्ष मनोज कुमार मिश्रा का हुआ। उन्होंने बताया कि बदमाश के छिपने वाले घर में आग लगने के आधा घंटे बाद तक गोलीबारी न होने से वह घर के नजदीक पहुंच गये। यहां उन्होंने पैर की ठोकर से दरवाजे को खोला, किंतु दस्यु ने उन्हें निशाना बनाकर फायर कर दिया। इससे उनका हाथ जख्मी हो गया और उनके हाथ की एक के-47 रायफल का कुंदा फट गया। इसके अलावा हेलीकाप्टर से लखनऊ रवाना होने से पूर्व घायलावस्था में बांदा के डीआईजी एस के सिंह ने कहा कि बदमाश को मारने के लिए घर की दीवारें गिरानी होंगी। घायलावस्था में जानकीकुंड अस्पताल में भर्ती रहे आईजी व डीआईजी का हाल जानने के लिए सतना के पुलिस अधीक्षक के डी पराशर व एसडीओपी जगन्नाथ मरकाम भी पहुंचे। जिलाधिकारी हृदेश कुमार भी पूरे समय जानकीकुंड चिकित्सालय में डटे रहे। दो दिनों में तीन साथियों की शहादत व शीर्षस्थ अफसरों के घायल होने के बाद अब यह मुठभेड़ प्रदेश पुलिस के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुकी है। इसके चलते बुधवार को एडीजी बृजलाल भी मुठभेड़ स्थल पहुंच गये हैं।

शहीद सिपाही को नम आंखों से दी विदाई

Jun 18, 02:07 am
चित्रकूट। दस्यु नान उर्फ घनश्याम केवट के हाथों शहीद हुये एसओजी टीम के सिपाही शमीम को बुधवार को पुलिस लाइन में गार्ड आफ आनर दिया गया। इसके बाद रोते-बिलखते परिजन शव को गृह जनपद बागपत ले गये।
पचास हजार के ईनामी दस्यु नान उर्फ नाम उर्फ घनश्याम केवट के हाथों पीएसी के कंपनी कमाण्डर समेत तीन लोगों की मौत के बाद बुधवार को पुलिस लाइन में गमगीन माहौल नजर आया। मंगलवार को शहीद हुये सिपाही शमीम का शव लेने पहुंचे उसके भाई अनीश व खुर्शीद पुलिस लाइन में मौजूद सिपाहियों के गले लगकर बिलख रहे थे। दोपहर एक बजे हेलीकाप्टर से पुलिस लाइन पहुंचे आईजी विजय कुमार गुप्ता ने परिजनों को ढांढस बंधाया। वह सीओ सिटी को शहीद सिपाही को गार्ड आफ आनर देने के निर्देश देने के साथ ही मुठभेड़ स्थल को रवाना हो गया। इसके बाद सीओ सिटी आलोक जायसवाल ने राजकीय सम्मान के साथ शहीद सिपाही को गार्ड आफ आनर दिया।
इस दौरान शहीद सिपाही के परिजनों ने बताया कि वर्ष 1998 में पुलिस में भर्ती होने वाला शमीम बागपत जिले के बिनौली थाने के जोहड़ी गांव का मूल निवासी था। तीन भाईयों में सबसे बड़े शमीम के दो मासूम बच्चे अंजुल व अनस हैं। शव लेने आये परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल था। सीओ सिटी व अन्य सिपाहियों से शहीद सिपाही के भाई बार-बार 'मेरा भाई वापस लौटा दो' की पुकार लगा रहे थे।

पुराने साजो सामान से लड़ रहे जवान

Jun 18, 02:07 am
चित्रकूट। जब साजो सामान ही नही तो फिर भला खतरनाक डाकुओं से मुकाबला कैसा। दो आईपीएस अधिकारियों की गंभीर रूप से जख्मी हालत व तीन जवानों के शहीद होने व चार पांच लोगों के जख्मी होकर अस्पताल पहुंचने की कहानी तो यही बयान करती है। तमाम पुलिस के जवानों की जुबानी पर यकीन किया जाये तो खतरनाक डकैतों के इस जिले में जिला पुलिस क्या प्रदेश की सबसे तेज और सटीक कार्यवाही की मास्टर माने जाने वाली एसटीएफ के पास वे साजो सामान व आयुध ही नही हैं जिनकी बदौलत बिगड़े हुये हालातों में जंग को जीता जा सके। पुलिस के सूत्र बताते हैं इस आपरेशन में लगभग पांच सौ से ऊपर जवान लगाये गये थे जिसमें कुल पचास के पास ही बुलेट पू्रफ जैकेट थी। आयुधों के हाल यह थे कि जिला पुलिस के तमाम जवान घटना स्थल के बाहर सिर्फ इस लिये खड़े थे क्योंकि उनके असलहे गोली चलाने में सक्षम नही थे। एटीएफ के जवान जहां अपने एडीशनल एसपी के घायल होने के बाद मोर्चे पर डटे होने के कारण और साथियों के घायल होने के कारण उच्चाधिकारियों की अदूरदर्शिता पूर्ण कार्यवाही पर उनकी झुंझलाहट देखते ही बनती थी। तमाम एटीटीएफ के जवान इस बात को लेकर अपनी तीखी प्रतिक्रिया भी व्यक्त कर रहे थे कि उनके क्विक मार्च का हुक्म तो दिया पर यहां की पूरी स्थिति बताने की जरूरत नही समझी। वे कह रहे थे जहां पर ड्रेगन लाइट, डायनामाइट व लांचर की जरूरत थी वे केवल अपने वेपन को लेकर ही आये। कहा कि अगर मौका दिया होता तो यह कार्यवाही केवल पांच घंटों में निपट जाती। एक अकेले डाकू द्वारा लगातार दो दिनों तक इस तरह मामले को लटकाये रखने लेकर जिला पुलिस के लोग भी काफी नाराज थे। उनका कहना था कि अगर उनके पास ही वेपन होते तो वे ही डाकू नान उर्फ घनश्याम केवट को कब का ढ़ेर कर चुके होते।

दहशत के कारण भाग गये ग्रामीण

Jun 18, 02:07 am
चित्रकूट। थाना राजापुर के गांव सुरवल के मजरे जमौली की किस्मत में शायद यही लिखा था। लगभग सौ घरों के केवटों के पुरवे में सौ में से केवल अस्सी घर सही सलामत ही बच पाये वरना सभी को कभी डाकू तो कभी पुलिस ने आग के हवाले कर दिया। लगातार आग की लपटों की निकलती लपटों के बाद सुरवल के तमाम वाशिंदों के साथ ही वहां पर मौजूद हर एक शख्स के जेहन में यह सवाल उठ खड़ा हुआ कि आखिर इन घरों के लोग गये कहां। जिलाधिकारी ह्देश कुमार ने एसडीएम को आदेश दिया कि गांव के लोगों को ढुढ़वाकर उनके खाने पीने की व्यवस्था करो तो एसडीएम ह्षिकेश भास्कर यशोद व तहसीलदार अश्वनी कुमार ने कानूनगो, लेखपाल व स्थानीय नागरिकों से बात करने की जो दास्तां व्यक्त की वह चौंकाने वाली थी। गांव के लगभग सौ घरों में रहने वाले डेढ़ सौ केवट परिवारों ने समीपवर्ती अपने रिश्तेदारियों में शरण ले रखी है और वे कतई यह स्वीकार करने को तैयार नही कि वे यहां के रहने वाले हैं। वैसे इसके पूर्व शुरु से ही मोर्चे को लीड़ करने वाली एडीशनल एसपी जुगुल किशोर ने बताया था कि मंगलवार की दोपहर से ही ग्रामीणों, महिलाओं व बच्चों को बाहर निकालकर स्कूल में सुरक्षित ठहराने के साथ पुलिस के जवानों के लिये आने वाले खाने पीने को गांव वालों को खिलाया गया था। एक ग्रामीण ने तो जिलाधिकारी को बताया कि पिछले दो दिन पूर्व इस पुरवे के केवट के घर में नौटंकी हुई थी। उसमें नान आया था। उसने पैसा लुटाने के साथ ही हर्ष फायरिंग भी की थी, पर उस कार्यक्रम में उन लोगों को नही बुलाया गया था। पुरवे के लोग काफी पहले से केवट जाति के डाकुओं को संरक्षण देते थे। इसलिये अब वे डर कर प्रशासन से दुबक रहे हैं।
नही पहुंचा कोई भी माननीय
पिछले दो दिनों से लगातार चल ही मुठभेड़ के बाद भी घटना स्थल पर अभी तक जिले का कोई भी माननीय घटना स्थल तक नही पहुंचा। सांसद विधायक या फिर पास के गांवों के प्रधानों का भी पता इस खतरनाक मुठभेड़ के दौरान जब हजारों की संख्या में लोग मौके पर थे। किसी भी माननीय ने वहां पर पहुंचकर जवानों का हौसला बढ़ाने की आवश्यकता नही समझी।

जब सही नहीं है साजो सामान तो कैसे जंग लड़ेंगे जवान

Jun 18, 02:07 am
चित्रकूट। जब साजोसामान ही नहीं तो भला खतरनाक डाकुओं से मुकाबला कैसा? जी हां, दो आईपीएस अधिकारियों के गंभीर रूप से जख्मी, तीन जवानों के शहीद होने व चार-पांच लोगों के जख्मी होकर अस्पताल पहुंचने की कहानी तो यही बयान करती है। पुलिस के जवानों की जबानी खतरनाक डकैतों के इस जिले में जिला पुलिस क्या, प्रदेश की सबसे तेज और सटीक कार्रवाई की मास्टर माने जानेवाली एसटीएफ के पास वे साजो सामान व आयुध ही नही हैं, जिनकी बदौलत बिगड़े हालात में जंग जीती जा सके।
सूत्र बताते हैं इस ऑपरेशन में लगभग पांच सौ से ऊपर जवान लगाये गए थे, जिसमें कुल पचास के पास ही बुलेटपू्रफ जैकेट थी। आयुधों के हाल यह थे कि जिला पुलिस के तमाम जवान घटनास्थल के बाहर मन मसोसकर सिर्फ इसलिए खड़े थे क्योंकि उनके असलहे गोली चलाने में सक्षम नहीं थे। एटीएफ के जवान जहां अपने एडीशनल एसपी के घायल होने के बाद मोर्चे पर डटे होने और साथियों के घायल होने के कारण उच्चाधिकारियों की अदूरदर्शितापूर्ण कार्यवाही पर झुंझलाहट से भरे नजर आ रहे थे।
तमाम एटीटीएफ जवान इस बात को लेकर तीखी प्रतिक्रिया भी व्यक्त कर रहे थे कि उन्हें क्विक मार्च का हुक्म तो दिया पर यहां की पूरी स्थिति बताने की जरूरत नहीं समझी। वे कह रहे थे जहां पर ड्रैगनलाइट, डायनामाइट व लॉन्चर की जरूरत थी, वे केवल अपने वेपन को लेकर ही आये। कहा कि अगर मौका दिया होता तो यह कार्रवाई केवल पांच घंटों में निपट जाती। एक अकेले डाकू द्वारा लगातार दो दिनों तक इस तरह मामले को लटकाये रखने को लेकर जिला पुलिस के लोग भी काफी नाराज थे। उनका कहना था कि अगर उनके पास सही वेपन होते तो वे ही डाकू नान उर्फ घनश्याम केवट को कब का ढ़ेर कर चुके होते।

जब सही नहीं है साजो सामान तो कैसे जंग लड़ेंगे जवान

Jun 18, 02:07 am
चित्रकूट। जब साजोसामान ही नहीं तो भला खतरनाक डाकुओं से मुकाबला कैसा? जी हां, दो आईपीएस अधिकारियों के गंभीर रूप से जख्मी, तीन जवानों के शहीद होने व चार-पांच लोगों के जख्मी होकर अस्पताल पहुंचने की कहानी तो यही बयान करती है। पुलिस के जवानों की जबानी खतरनाक डकैतों के इस जिले में जिला पुलिस क्या, प्रदेश की सबसे तेज और सटीक कार्रवाई की मास्टर माने जानेवाली एसटीएफ के पास वे साजो सामान व आयुध ही नही हैं, जिनकी बदौलत बिगड़े हालात में जंग जीती जा सके।
सूत्र बताते हैं इस ऑपरेशन में लगभग पांच सौ से ऊपर जवान लगाये गए थे, जिसमें कुल पचास के पास ही बुलेटपू्रफ जैकेट थी। आयुधों के हाल यह थे कि जिला पुलिस के तमाम जवान घटनास्थल के बाहर मन मसोसकर सिर्फ इसलिए खड़े थे क्योंकि उनके असलहे गोली चलाने में सक्षम नहीं थे। एटीएफ के जवान जहां अपने एडीशनल एसपी के घायल होने के बाद मोर्चे पर डटे होने और साथियों के घायल होने के कारण उच्चाधिकारियों की अदूरदर्शितापूर्ण कार्यवाही पर झुंझलाहट से भरे नजर आ रहे थे।
तमाम एटीटीएफ जवान इस बात को लेकर तीखी प्रतिक्रिया भी व्यक्त कर रहे थे कि उन्हें क्विक मार्च का हुक्म तो दिया पर यहां की पूरी स्थिति बताने की जरूरत नहीं समझी। वे कह रहे थे जहां पर ड्रैगनलाइट, डायनामाइट व लॉन्चर की जरूरत थी, वे केवल अपने वेपन को लेकर ही आये। कहा कि अगर मौका दिया होता तो यह कार्रवाई केवल पांच घंटों में निपट जाती। एक अकेले डाकू द्वारा लगातार दो दिनों तक इस तरह मामले को लटकाये रखने को लेकर जिला पुलिस के लोग भी काफी नाराज थे। उनका कहना था कि अगर उनके पास सही वेपन होते तो वे ही डाकू नान उर्फ घनश्याम केवट को कब का ढ़ेर कर चुके होते।

कहां गायब हो गये ग्रामीण

Jun 18, 02:07 am
चित्रकूट। थाना राजापुर के गांव सुरवल के मजरे जमौली की किस्मत में शायद यही लिखा था। लगभग सौ घरों के केवटों के पुरवे में केवल अस्सी घर सही सलामत बच पाये वरना सभी को कभी डाकू तो कभी पुलिस ने आग के हवाले कर दिया। लगातार निकलती आग की लपटों के बाद सुरवल के तमाम बाशिंदों के साथ ही वहां मौजूद हर एक शख्स के जेहन में यह सवाल उठ खड़ा हुआ कि आखिर इन घरों के लोग गये कहां। जिलाधिकारी हृदेशकुमार ने एसडीएम को आदेश दिया कि गांव के लोगों को ढुंढ़वाकर उनके खाने पीने की व्यवस्था करो तो एसडीएम हृषिकेश भास्कर यशोद व तहसीलदार अश्वनी कुमार से गांववालों ने जो दास्तां कही, वह चौंकानेवाली थी। गांव के लगभग सौ घरों में रहनेवाले डेढ़ सौ केवट परिवारों ने समीपवर्ती अपने रिश्तेदारियों में शरण ले रखी है और कतई यह स्वीकार करने को तैयार नहीं कि वे यहां के रहनेवाले हैं। वैसे इसके पूर्व शुरू से ही मोर्चे को लीड करनेवाले एडीशनल एसपी जुगुलकिशोर ने बताया था कि मंगलवार की दोपहर से ही ग्रामीणों, महिलाओं व बच्चों को बाहर निकालकर स्कूल में सुरक्षित ठहराने के साथ पुलिस के जवानों के लिए आनेवाले खाने-पीने की वस्तुएं गांव वालों को दी गईं। एक ग्रामीण ने तो जिलाधिकारी को बताया कि पिछले दो दिन पूर्व इस पुरवे के केवट के घर में नौटंकी हुई थी। उसमें नान आया था। उसने पैसा लुटाने के साथ ही हर्ष फायरिंग भी की थी पर उस कार्यक्रम में उन लोगों को नहीं बुलाया गया था। पुरवे के लोग काफी पहले से केवट जाति के डाकुओं को संरक्षण देते थे इसलिए अब वे मारे डर के प्रशासन से दुबक रहे हैं।
नही पहुंचा कोई भी माननीय
पिछले दो दिनों से लगातार चल ही मुठभेड़ के बाद भी घटनास्थल पर अभी तक जिले का कोई भी माननीय घटना स्थल तक नही पहुंचा। सांसद, विधायक या फिर पास के गांवों के प्रधानों का भी पता इस खतरनाक मुठभेड़ के दौरान जब हजारों की संख्या में लोग मौके पर थे। किसी भी माननीय ने वहां पहुंचकर जवानों का हौसला बढ़ाने की आवश्यकता नहीं समझी।

दस्यु नान से मुठभेड़ जारी, दो और शहीद

Jun 18, 02:07 am
चित्रकूट। राजापुर थाना क्षेत्र के जमौली गांव में दस्यु नान उर्फ घनश्याम केवट व पुलिस के बीच मंगलवार को शुरू हुई मुठभेड़ बुधवार को भी चलती रही। दूसरे दिन दस्यु नान की फायरिंग से पीएसी के कंपनी कमांडर व एक सिपाही शहीद हो गये। वहीं आईजी पीएसी व डीआईजी बांदा समेत पांच लोग घायल हो गये। घायलों को हेलीकॉप्टर से पीजीआई लखनऊ भेजा गया। समाचार लिखे जाने तक मुठभेड़ जारी थी और एडीजी बृजलाल ने अभियान की कमान संभाल ली थी।
बताते चलें कि राजापुर के जमौली गांव में मंगलवार को दस्यु नान केवट से शुरू हुई मुठभेड़ में एसओजी का जवान शमीम शहीद हो गया था और दो सिपाही घायल हो गये थे। पुलिस द्वारा गांव को चारों ओर से घेरने के बाद रातभर रुक-रुक कर फायरिंग होती रही। बुधवार सुबह पुलिस ने नये सिरे से रणनीति बनायी। जिस घर में दस्यु नान रुका था, उस घर में जब एसटीएफ टीम ने घुसने की कोशिश की तो उसने अंदर से फायरिंग कर दी। जिससे छत में पोजीशन लेकर फायरिंग कर रहे पीएसी के कंपनी कमाडर बेनीमाधव सिंह शहीद हो गये जबकि एसटीएफ के कमांडो अकरम व इंसपेक्टर नावेन्दु घायल हो गये। इसके थोड़ी देर बाद ही डीआईजी बांदा के गनर इकबाल को गोली लगी। उसे राजापुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां चिकित्सकों ने इकबाल को मृत घोषित कर दिया। दोपहर लगभग बारह बजे पुलिस ने उन घरों में आग लगा दी, जहां दस्यु नान रुका था। लगभग एक घंटा तक आग लगी रही। इस दौरान दस्यु ने भी फायरिंग बंद कर दी। बाद में फायर बिग्रेड के जवानों ने घरों में लगी आग को बुझाया। आग बुझाने के बाद उन घरों में घुसने की योजना बनायी गयी। जैसे ही पुलिस आगे बढ़ी, दस्यु नान ने फिर फायरिंग शुरू कर दी, जिससे आईजी पीएसी बीके गुप्त व डीआईजी बांदा एसके सिंह के पेट व कौशाम्बी के पश्चिम शरीरा के थाना प्रभारी मनोजकुमार मिश्र के हाथ में गोली लग गयी। घायल आईजी, डीआईजी व दरोगा को जानकीकुंड चिकित्सालय लाया गया।
घटनास्थल पर ही मौजूद जिलाधिकारी हृदयेशकुमार व एसडीएम सदर हृषिकेश भास्कर यशोद के साथ ही अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को एक समाचार चैनल की ओबी वैन की ओट लेनी पड़ी। समाचार लिखे जाने तक दोनों तरफ से जोरदार गोलीबारी जारी थी। एडीजी के साथ आईजी सूर्यकुमार शुक्ल और एसटीएफ, पीएसी व पुलिस के जवान मोर्चे पर डटे हुए थे।
इसके पूर्व मंगलवार देर शाम के बाद डाकू ने रुक-रुककर कई राउंड फायरिंग की। कच्चे-पक्के घरों के भीतर होने से उसकी स्थिति की जानकारी पुलिस को न होने के कारण कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ा। दिनभर की फायरिंग के बीच ही लगभग चार बार गांव के लगभग तीस मकानों पर एक बार डाकू व तीन बार पुलिस को आग लगानी पड़ी।
आईजी पीएसी वीके गुप्त, डीआईजी बांदा सुशीलकुमार सिंह के बाद आईजी सूर्यकुमार शुक्ल ने डाकू को सरेंडर करने की धमकी दी, जिसके बाद जोरदार गोलीबारी हुई और उसके बाद जिस मकान में डाकू छिपा था वहां पर अधिकारी यह मानकर पहुंच गये कि शायद वह मर चुका है। इसी बीच डाकू ने गोली चलाकर दोनो को गंभीर रूप से घायल कर दिया।

आधुनिक हथियारों पर भारी रही एक रायफल

Jun 19, 01:54 am
चित्रकूट। एक तीन सौ बारह बोर की रायफल और लगभग डेढ़ सौ गोलियों के साथ चार पुलिस जवानों को मारने और पूरी पुलिस को 51 घंटों तक छकाने और उनकी रणनीतियों को विफल करते रहने का माद्दा। यह उस एक अदद डकैत से यूपी पुलिस के लड़ने की कहानी है जिसने जिले से लेकर प्रदेशस्तर तक की पुलिस व्यवस्था को हिलाकर रख दिया। पिछले साल सिपाही अभय राय को मारकर पचास हजार का इनामी बनने वाला डाकू घनश्याम इतना खूंखार हो जायेगा किसी ने सोचा भी नहीं था।
सटीक मुखबिरी के सहारे मंगलवार को सुबह दस बजे जरौली गांव में पहुंचे लगभग आधा दर्जन से ज्यादा पुलिसकर्मियों में से एक की जान लेने के साथ ही दो को घायल करने के बाद तो उसने आतंक का ऐसा खेल खेला कि किसी को ऐसी उम्मीद ही नहीं थी। पुलिस की पूरी कार्रवाई देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे बैकफुट पर डाकू नान नहीं बल्कि पुलिस थी। पुलिस टीम के सबसे काबिल माने जाने वाले एडीजी को इस दस्यु को अंजाम तक पहुंचाने के लिए लगभग बाइस घंटे लग गये। पिछले तीन दिनों से आतंक के इबारत की नई परिभाषा गढ़कर सुर्खियां बटोरने वाले डाकू के आतंक और खौफ की कहानी पीएसी के जवानों के साथ ही जिला पुलिस के सिर चढ़कर बोल रही है। डाकू के दिन में बारह बजे छिपे हुए स्थान से भागने के बाद एसओजी और एसटीएफ उसके पीछे भागी और डाकू को मारने में इनकी ही टीम ने जाबांजी दिखाई और परिणाम स्वरूप गुरुवार को लगभग डेढ़ बजे डाकू नान उर्फ घनश्याम को नाले में मार दिया गया।

51 घंटे बाद खत्म हुआ नान केवट का आतंक

Jun 19, 01:54 am
चित्रकूट । तीन दिनों से आतंक की इबारत लिखने वाले पचास हजार के इनामी डाकू नान उर्फ घनश्याम केवट को आखिरकार एसटीएफ और एसओजी ने मार गिराया। उसे गुरुवार अपराह्न डेढ़ बजे जमौली गांव से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर बगीचे के नाले में जवानों ने गोलियों से ढेर कर दिया। हालांकि गुरुवार सुबह यह दुर्दात दस्यु घर में घुसने का प्रयास कर रहे इलाहाबाद पुलिस के जवान बीर सिंह को मार चुका था। मारे गये दस्यु के पास से तीन सौ बारह बोर की फैक्ट्री मेड रायफल व काफी मात्रा में जिंदा कारतूस मिले।
इसके पहले बुधवार रातभर एडीजी कानून व्यवस्था बृजलाल खुद मोर्चे पर डटे रहे। पूरी रात एक-दो बार छिटपुट गोलीबारी हुई। डाकू ने एक या दो ही फायर किये पर पुलिस के जवानों ने काफी फायर झोंके। दिन होते-होते जेसीबी मशीन मंगा ली गयी। पास के कच्चे मकानों को गिराने के बाद जब वह नान के छिपने वाले मकान की ओर बढ़ी तो दस्यु के एक फायर ने जेसीबी के ड्राइवर को रोक दिया। पुलिस सुरक्षा के तमाम आश्वासनों के बाद भी वह नही रुका और मौके से भाग खड़ा हुआ। इसके बाद पुलिस ने पास के घर में आग लगाने के साथ आंसू गैस का इस्तेमाल कर फायरिंग की। जवाब में दस्यु नान भी रुक-रुक कर फायरिंग करता रहा। चारों ओर से घिर जाने के बाद दस्यु नान दोपहर बारह बजे अंडरवियर व बनियान और पैरों में जूता पहने, एक हाथ में बंदूक व दूसरे हाथ में पट्टा लिये पुलिस का घेरा तोड़कर भाग निकला। मकानों के ऊपर छलांग लगाता देख कुछ पुलिस के जवानों ने उस पर फायरिंग की पर वह बच निकला। वहां से भागकर वह लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर एक नाले में जाकर छिप गया। पुलिस ने पीछा कर कई राउंड हवाई फायरिंग की पर उन्हें उसकी सही लोकेशन नहीं मिली। तब नाले के ऊपर घास पर आग लगा दी गयी। काफी देर बाद वह पास लगे आम के पेड़ की ओट से सटकर नाले में घुस गया। यही नाला उसकी कब्रगाह बन गया। तीन तरफ से घेराबंदी कर निकले एसटीएफ व एसओजी के जवानों में कई फायर कर नान को मौत के घाट उतार दिया। तब तक पीएसी के जवान भी पहुंच गये और दस्यु पर गोलियां चलाकर छलनी कर दिया। उसकी मौत के बाद आईजी इलाहाबाद सूर्यकुमार शुक्ल ने अपनी टीम को बधाई देते हुए कहा कि इसके ऊपर घोषित इनाम के अलावा भी अधिकारियों के स्तर से इनाम दिया जाएगा। गौरतलब है कि मंगलवार से प्रदेश पुलिस के दो शीर्ष अधिकारियों समेत पांच को घायल और चार लोगों को शहीद करने वाला डाकू नान उर्फ घनश्याम केवट अपने आतंक का खेल केवल एक बंदूक के सहारे ही खेल रहा था। दस्यु को मारने में एसओजी के कमांडो संजय सिंह, शैलेन्द्र सिंह, अजय सिंह व भानुप्रताप और एसटीएफ के संदीप ने प्रमुख भूमिका निभायी।

51 घंटे का आतंक खत्म, नान केवट ढेर

चित्रकूट। तीन दिनों से आतंक की इबारत लिखने वाले पचास हजार के इनामी डाकू नान उर्फ घनश्याम केवट को आखिरकार एसटीएफ और एसओजी ने मार गिराया। उसे गुरुवार अपराह्न डेढ़ बजे जमौली गांव से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर बगीचे के नाले में जवानों ने गोलियों से ढेर कर दिया। हालांकि गुरुवार सुबह यह दुर्दात दस्यु घर में घुसने का प्रयास कर रहे इलाहाबाद पुलिस के जवान बीर सिंह को मार चुका था। मारे गये दस्यु के पास से तीन सौ पंद्रह बोर की रायफल व काफी मात्रा में जिंदा कारतूस मिले।
इसके पहले बुधवार रातभर एडीजी कानून व्यवस्था बृजलाल खुद मोर्चे पर डटे रहे। पूरी रात एक-दो बार छिटपुट गोलीबारी हुई। डाकू ने एक या दो ही फायर किये पर पुलिस के जवानों ने कई फायर झोंके। दिन होते-होते जेसीबी मशीन मंगा ली गयी। पास के कच्चे मकानों को गिराने के बाद जब वह नान के छिपने वाले मकान की ओर बढ़ी तो दस्यु के एक फायर ने जेसीबी के ड्राइवर को रोक दिया। पुलिस सुरक्षा के तमाम आश्वासनों के बाद भी ड्राइवर नहीं रुका और मौके से भाग गया। इसके बाद पुलिस ने पास के घर में आग लगाने के साथ आंसू गैस का इस्तेमाल कर फायरिंग की। जवाब में दस्यु नान भी रुक-रुक कर फायरिंग करता रहा। चारों ओर से घिर जाने के बाद दस्यु नान दोपहर बारह बजे अंडरवियर व बनियान और पैरों में जूता पहने, एक हाथ में बंदूक व दूसरे हाथ में पट्टा लिये पुलिस का घेरा तोड़कर भाग निकला। मकानों के ऊपर छलांग लगाता देख कुछ पुलिस के जवानों ने उस पर फायरिंग की पर वह बच निकला। वहां से भागकर वह लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर एक नाले में जाकर छिप गया। पुलिस ने पीछा कर कई राउंड हवा में फायरिंग की पर उन्हें उसकी सही लोकेशन नहीं मिली। तब नाले के ऊपर घास पर आग लगा दी गई। काफी देर बाद वह पास के आम के पेड़ की ओट से सरककर नाले में घुस गया। यही नाला उसकी कब्रगाह बन गया। तीन तरफ से घेराबंदी कर एसटीएफ व एसओजी के जवानों ने कई फायर कर नान को मौत के घाट उतार दिया। तब तक पीएसी के जवान भी पहुंच गये और दस्यु पर गोलियां चलाकर छलनी कर दिया। उसकी मौत के बाद आईजी इलाहाबाद सूर्य कुमार शुक्ल ने अपनी टीम को बधाई देते हुए कहा कि इसके ऊपर घोषित इनाम के अलावा भी अधिकारियों के स्तर से इनाम दिया जाएगा। गौरतलब है कि मंगलवार से प्रदेश पुलिस के दो शीर्ष अधिकारियों समेत पांच को घायल और चार लोगों को शहीद करने वाला डाकू नान उर्फ घनश्याम केवट अपने आतंक का खेल केवल एक बंदूक के सहारे ही खेल रहा था। दस्यु को मारने में एसओजी के कमांडो संजय सिंह, शैलेन्द्र सिंह, अजय सिंह व भानुप्रताप और एसटीएफ के संदीप ने प्रमुख भूमिका निभायी।