शनिवार, 20 जून 2009

आधुनिक हथियारों पर भारी रही एक रायफल

Jun 19, 01:54 am
चित्रकूट। एक तीन सौ बारह बोर की रायफल और लगभग डेढ़ सौ गोलियों के साथ चार पुलिस जवानों को मारने और पूरी पुलिस को 51 घंटों तक छकाने और उनकी रणनीतियों को विफल करते रहने का माद्दा। यह उस एक अदद डकैत से यूपी पुलिस के लड़ने की कहानी है जिसने जिले से लेकर प्रदेशस्तर तक की पुलिस व्यवस्था को हिलाकर रख दिया। पिछले साल सिपाही अभय राय को मारकर पचास हजार का इनामी बनने वाला डाकू घनश्याम इतना खूंखार हो जायेगा किसी ने सोचा भी नहीं था।
सटीक मुखबिरी के सहारे मंगलवार को सुबह दस बजे जरौली गांव में पहुंचे लगभग आधा दर्जन से ज्यादा पुलिसकर्मियों में से एक की जान लेने के साथ ही दो को घायल करने के बाद तो उसने आतंक का ऐसा खेल खेला कि किसी को ऐसी उम्मीद ही नहीं थी। पुलिस की पूरी कार्रवाई देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे बैकफुट पर डाकू नान नहीं बल्कि पुलिस थी। पुलिस टीम के सबसे काबिल माने जाने वाले एडीजी को इस दस्यु को अंजाम तक पहुंचाने के लिए लगभग बाइस घंटे लग गये। पिछले तीन दिनों से आतंक के इबारत की नई परिभाषा गढ़कर सुर्खियां बटोरने वाले डाकू के आतंक और खौफ की कहानी पीएसी के जवानों के साथ ही जिला पुलिस के सिर चढ़कर बोल रही है। डाकू के दिन में बारह बजे छिपे हुए स्थान से भागने के बाद एसओजी और एसटीएफ उसके पीछे भागी और डाकू को मारने में इनकी ही टीम ने जाबांजी दिखाई और परिणाम स्वरूप गुरुवार को लगभग डेढ़ बजे डाकू नान उर्फ घनश्याम को नाले में मार दिया गया।

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