रविवार, 21 जून 2009

यहां पर साहेब बन गये रसोइया

Jun 21, 02:45 am
चित्रकूट। डाकू घनश्याम केवट उर्फ नान केकारण बर्बाद हो चुके गांव के हर एक व्यक्ति को अब प्रशासन द्वारा दी जाने वाली रोटी और सब्जी की ही आस दिखाई देती है। ऐसा इसलिये है क्योंकि कल तक जिन्हें वे 'साहेब' कहकर आदर देते थे आज वे उनके लिए रसोइया बन गये हैं। कानूनगो, लेखपाल और सप्लाई इंसपेक्टर गांव वालों के लिए रोटी और सब्जी बना रहे हैं। पिछले चार दिनों से चल रहे राहत शिविर में आग के कारण विस्थापित हुये परिवारों को गांव के लेखपाल को तो गांव में नुकसान की गणना के लिए तैनात कर दिया गया है।
शनिवार को जब पूर्वाह्न 11 बजे जागरण की टीम गांव जमौली पहुंची तो बाहर ही बने विद्यालय प्रांगण में चूल्हे पर कानूनगो गुरु चरण पांडेय, लेखपाल नैनी राम अभिलाष त्रिपाठी, लेखपाल बिलास विश्वेश्वर दयाल शुक्ल, जमौली लेखपाल राम बाबू सिंह, लेखपाल अर्की सूरज पाल सिंह, लेखपाल खोपा सुन्दर लाल सिंह सब्जी बनाने में लगे हुए थे। पास ही बैठे नायब तहसीलदार उन्हें खाना बनाने की विधि बता रहे थे। गांव की महिलाएं आट माड़ रही थीं। राजस्व कर्मियों का खाना बनाना महिलाओं को अच्छा नहीं लगा रहा था। बात करने पर उन्होंने कहा कि कि उई तौ साहेब आय, हियां मेहेरियां मोटाई करती हैं, या नहीं कै सब जनै आकै खाना बनवावैं। लेखपाल अर्की ने बताया कि यहां दिक्कत होने के कारण भोजन व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के विभाग की है। इसलिये सबकी ड्यूटी लगा दी गई है। बताया कि पिछले चार दिनों में दो दिन तो जिलाधिकारी स्वयं ही पूरे समय रहे। जबकि एसडीएम और तहसीलदार भी लगातार ही यहां पर दिन में दो से तीन बार आ जाते हैं। यहां खाना बनते ही बच्चे खाने पर टूट पड़ते हैं। सप्लाई इंसपेक्टर शिव प्रसाद शर्मा ने बताया कि उनके पास अभी पांच छह दिनों का राशन उनके पास है। आगे की व्यवस्था जिलाधिकारी के आदेश पर कर दी जायेगी।

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