शुक्रवार, 19 जून 2009

दहशत के कारण भाग गये ग्रामीण

Jun 18, 02:07 am
चित्रकूट। थाना राजापुर के गांव सुरवल के मजरे जमौली की किस्मत में शायद यही लिखा था। लगभग सौ घरों के केवटों के पुरवे में सौ में से केवल अस्सी घर सही सलामत ही बच पाये वरना सभी को कभी डाकू तो कभी पुलिस ने आग के हवाले कर दिया। लगातार आग की लपटों की निकलती लपटों के बाद सुरवल के तमाम वाशिंदों के साथ ही वहां पर मौजूद हर एक शख्स के जेहन में यह सवाल उठ खड़ा हुआ कि आखिर इन घरों के लोग गये कहां। जिलाधिकारी ह्देश कुमार ने एसडीएम को आदेश दिया कि गांव के लोगों को ढुढ़वाकर उनके खाने पीने की व्यवस्था करो तो एसडीएम ह्षिकेश भास्कर यशोद व तहसीलदार अश्वनी कुमार ने कानूनगो, लेखपाल व स्थानीय नागरिकों से बात करने की जो दास्तां व्यक्त की वह चौंकाने वाली थी। गांव के लगभग सौ घरों में रहने वाले डेढ़ सौ केवट परिवारों ने समीपवर्ती अपने रिश्तेदारियों में शरण ले रखी है और वे कतई यह स्वीकार करने को तैयार नही कि वे यहां के रहने वाले हैं। वैसे इसके पूर्व शुरु से ही मोर्चे को लीड़ करने वाली एडीशनल एसपी जुगुल किशोर ने बताया था कि मंगलवार की दोपहर से ही ग्रामीणों, महिलाओं व बच्चों को बाहर निकालकर स्कूल में सुरक्षित ठहराने के साथ पुलिस के जवानों के लिये आने वाले खाने पीने को गांव वालों को खिलाया गया था। एक ग्रामीण ने तो जिलाधिकारी को बताया कि पिछले दो दिन पूर्व इस पुरवे के केवट के घर में नौटंकी हुई थी। उसमें नान आया था। उसने पैसा लुटाने के साथ ही हर्ष फायरिंग भी की थी, पर उस कार्यक्रम में उन लोगों को नही बुलाया गया था। पुरवे के लोग काफी पहले से केवट जाति के डाकुओं को संरक्षण देते थे। इसलिये अब वे डर कर प्रशासन से दुबक रहे हैं।
नही पहुंचा कोई भी माननीय
पिछले दो दिनों से लगातार चल ही मुठभेड़ के बाद भी घटना स्थल पर अभी तक जिले का कोई भी माननीय घटना स्थल तक नही पहुंचा। सांसद विधायक या फिर पास के गांवों के प्रधानों का भी पता इस खतरनाक मुठभेड़ के दौरान जब हजारों की संख्या में लोग मौके पर थे। किसी भी माननीय ने वहां पर पहुंचकर जवानों का हौसला बढ़ाने की आवश्यकता नही समझी।

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