Jun 18, 02:07 am
चित्रकूट। जब साजो सामान ही नही तो फिर भला खतरनाक डाकुओं से मुकाबला कैसा। दो आईपीएस अधिकारियों की गंभीर रूप से जख्मी हालत व तीन जवानों के शहीद होने व चार पांच लोगों के जख्मी होकर अस्पताल पहुंचने की कहानी तो यही बयान करती है। तमाम पुलिस के जवानों की जुबानी पर यकीन किया जाये तो खतरनाक डकैतों के इस जिले में जिला पुलिस क्या प्रदेश की सबसे तेज और सटीक कार्यवाही की मास्टर माने जाने वाली एसटीएफ के पास वे साजो सामान व आयुध ही नही हैं जिनकी बदौलत बिगड़े हुये हालातों में जंग को जीता जा सके। पुलिस के सूत्र बताते हैं इस आपरेशन में लगभग पांच सौ से ऊपर जवान लगाये गये थे जिसमें कुल पचास के पास ही बुलेट पू्रफ जैकेट थी। आयुधों के हाल यह थे कि जिला पुलिस के तमाम जवान घटना स्थल के बाहर सिर्फ इस लिये खड़े थे क्योंकि उनके असलहे गोली चलाने में सक्षम नही थे। एटीएफ के जवान जहां अपने एडीशनल एसपी के घायल होने के बाद मोर्चे पर डटे होने के कारण और साथियों के घायल होने के कारण उच्चाधिकारियों की अदूरदर्शिता पूर्ण कार्यवाही पर उनकी झुंझलाहट देखते ही बनती थी। तमाम एटीटीएफ के जवान इस बात को लेकर अपनी तीखी प्रतिक्रिया भी व्यक्त कर रहे थे कि उनके क्विक मार्च का हुक्म तो दिया पर यहां की पूरी स्थिति बताने की जरूरत नही समझी। वे कह रहे थे जहां पर ड्रेगन लाइट, डायनामाइट व लांचर की जरूरत थी वे केवल अपने वेपन को लेकर ही आये। कहा कि अगर मौका दिया होता तो यह कार्यवाही केवल पांच घंटों में निपट जाती। एक अकेले डाकू द्वारा लगातार दो दिनों तक इस तरह मामले को लटकाये रखने लेकर जिला पुलिस के लोग भी काफी नाराज थे। उनका कहना था कि अगर उनके पास ही वेपन होते तो वे ही डाकू नान उर्फ घनश्याम केवट को कब का ढ़ेर कर चुके होते।
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