Jun 18, 02:07 am
चित्रकूट। दस्यु नान उर्फ घनश्याम केवट के हाथों शहीद हुये एसओजी टीम के सिपाही शमीम को बुधवार को पुलिस लाइन में गार्ड आफ आनर दिया गया। इसके बाद रोते-बिलखते परिजन शव को गृह जनपद बागपत ले गये।
पचास हजार के ईनामी दस्यु नान उर्फ नाम उर्फ घनश्याम केवट के हाथों पीएसी के कंपनी कमाण्डर समेत तीन लोगों की मौत के बाद बुधवार को पुलिस लाइन में गमगीन माहौल नजर आया। मंगलवार को शहीद हुये सिपाही शमीम का शव लेने पहुंचे उसके भाई अनीश व खुर्शीद पुलिस लाइन में मौजूद सिपाहियों के गले लगकर बिलख रहे थे। दोपहर एक बजे हेलीकाप्टर से पुलिस लाइन पहुंचे आईजी विजय कुमार गुप्ता ने परिजनों को ढांढस बंधाया। वह सीओ सिटी को शहीद सिपाही को गार्ड आफ आनर देने के निर्देश देने के साथ ही मुठभेड़ स्थल को रवाना हो गया। इसके बाद सीओ सिटी आलोक जायसवाल ने राजकीय सम्मान के साथ शहीद सिपाही को गार्ड आफ आनर दिया।
इस दौरान शहीद सिपाही के परिजनों ने बताया कि वर्ष 1998 में पुलिस में भर्ती होने वाला शमीम बागपत जिले के बिनौली थाने के जोहड़ी गांव का मूल निवासी था। तीन भाईयों में सबसे बड़े शमीम के दो मासूम बच्चे अंजुल व अनस हैं। शव लेने आये परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल था। सीओ सिटी व अन्य सिपाहियों से शहीद सिपाही के भाई बार-बार 'मेरा भाई वापस लौटा दो' की पुकार लगा रहे थे।
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