रविवार, 21 जून 2009

गांव वालेन के जुलुम से डाकू बन गा

Jun 20, 01:52 am
चित्रकूट। समय बड़ा बलवान होता है। कभी डाकू घनश्याम की पत्नी होने की हनक रखने वाली उर्मिला का साथ देने के लिए आज कोई तैयार नहीं। उर्मिला से जब जागरण ने बातचीत की तो उसका दर्द आंसुओं के सैलाब के रूप में सामने आ गया। कहा कि 'भइया मोर आदमी गांव वालेन के जुलुम से डाकू बन गा, डाकू बनै के बाद वा हमैं भूलिगा, पै मैं ओहेके मेहेरिया आहूं, मैं वही कै लाश का पूरा संस्कार करवाईहौं।'
खुद मजदूरी कर अपने बच्चों का पेट भरने व खानाबदोश सी जिंदगी बिताने का दावा करने वाली पचास हजार के इनामी घनश्याम की पत्नी उर्मिला ने शव विच्छेदन गृह के पास जागरण से बातचीत में खुलासा किया कि उसकी किसी बहन की शादी जमौली में नही हुई थी। न ही उसकी किसी भी प्रकार की रिश्तेदारी जमौली में है।
उसका पति जब से डकैत हो गया था तक से वह चार-पांच बार ही उससे मिली थी, वह भी जंगल में। वह घर कभी नहीं आया। कहा कि उसके पति ने कभी उसकी पैसे से कोई मदद नही की और न ही बच्चों के बारे में कोई जानकारी की। उसने कहा कि आज की तारीख में न तो उसके मां बाप जीवित हैं और न ही सास ससुर। यहां तक की जिस भाई की लड़की के कारण उसका पति बागी हुआ उसके परिवार ने भी साथ छोड़ दिया।
पत्नी ने बताया कि उसका विवाह नान के साथ लगभग बीस वर्ष पहले हुआ था। तीन पुत्रियों में सबसे बड़ी सरोजा की शादी रिश्तेदारों से भीख मांगकर किसी प्रकार कर दी। उसके पति ने न तो पुत्री के विवाह में और न ही और कभी एक रुपये की भी मदद की। घर तो पुलिस पहले ही गिरा चुकी थी। अब तो उसका व उसके बच्चों का जीवन खानाबदोशों सा ही है।

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