Jun 21, 02:45 am
चित्रकूट। एक डाकू ने गांव में घुसकर कुछ ऐसा कर डाला कि अब उस छोटे से बच्चे का नाम लोग 'बरबादी' कहने लगे हैं। गांव के लोग कहते हैं कि राजकरन का पुत्र गांव की बरबादी लेकर आया, न उसके पैदा होने में नौटंकी होती और न वह पूरे गांव वालों की नौटकी करवाता। इसके साथ ही डाकू को संरक्षण देने का आरोप लगने पर बदनामी हो रही है सो अलग।
डाकू घनश्याम ने जिस अंतिम घर से पुलिस से लगभग छत्तीस घंटों तक मुकाबला किया और एक जवान को शहीद कर दिया उस घर के रहने वाले भालेन्द्र निषाद बताते हैं कि गांव में न तो किसी से उसकी रिश्तेदारी थी और न ही किसी ने कभी उसे शरण देने के बारे में सोचा भी। डकैतों को शरण देकर कौन आफत मोल लेना चाहेगा। इस हादसे में उसकी खुद मोटर साइकिल भी जल गयी। कच्चे घरों के कई कमरे भी जल गये।
बताया कि सोमवार की रात 3 बजे नौटंकी की आवाज सुनकर डाकू नान गांव में आया और आते ही उसने एक फायर किया। फायर की सुनकर नौटंकी बंद हो गयी और लोग भाग गये। फिर उसने नौटंकी चालू करने के लिये कहा। सुबह लगभग 4.30 पर वह राम प्रसाद के घर में घुस गया और घमकी दिया कि किसी को बताया तो परिवार सहित गोली मार देगा। सुबह 8.30 पर राम प्रसाद के लड़के राजू ने राजापुर पुलिस को उसके घर में घुसने की खबर दे दी। सबसे पहले गांव में टीम तीन मोटर साइकिलों पर एसओजी की आई और उसमें पूरे गांव में जाकर पोजिशन ले ली। इसी समय पुलिस की जीपों में भरकर भी जवान आये और घरों की तलाशी लेने लगे। तभी राम प्रसाद की पत्नी ने पुलिस को सही कमरे का पता बताया कि उस कमरे में भूसा रखा है और जैसे ही एसओजी के शमीम सिपाही ने उस कमरे में झांका डाकू ने सीधे उस पर गोली चला दी। वह वहीं पर गिर पड़ा। इसके साथ ही पोजीशन लेने के लिये भागने वाले राजेन्द्र सिंह व दिलीप तिवारी को भी गोली मारकर घायल कर दिया। उसने कहा कि जब खुद ही राम प्रसाद के घर वालों ने डाकू होने की सूचना पुलिस को दी तो पूरा गांव या वे संरक्षणदाता कैसे हो सकते हैं। पहले भी गांव में डाकू शंकर केवट एक दो बार इस उम्मीद से आया था कि शायद केवट होने के कारण लोग उसकी मदद करेंगे पर सभी ने उसको देखकर किवाड़ बंद कर लिये थे। बताया कि डाकू उसके घर से भागने के बाद पुलिस व पीएसी ने उनके पूरे घर की तलाशी ली और काफी सामान के साथ पैसा भी उठा ले गयी।
बताया कि उसके भाई महावीर की शादी 9 मई को मुरइया मे होनी थी पर किन्हीं कारणों के कारण बारात वहां से वापिस आ गयी। भाई की शादी 1 जुलाई को समशाबाद में तय थी। विवाह की तैयारियों के लिये पूरा सामान रखा हुआ था सब का सब बर्बाद हो गया। इसका खामियाजा कौन देगा?
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