मंगलवार, 23 जून 2009

पीडि़तों को प्रशासन ने राहत दी

Jun 23, 11:37 am
चित्रकूट। डाकू घनश्याम के कारण आग की तपिश से झुलसने वाले जमौली गांव के पीडि़तों को राहत देने का काम प्रशासन के साथ ही रेडक्रास सोसायटी ने किया। जिलाधिकारी ह्देश कुमार के साथ ही सदर विधायक दिनेश मिश्र ने पहुंचकर गांव वालों को जहां एक तरफ मानसिक रुप से मजबूत होने का संदेश दिया वहीं दोबारा अपनी पुरानी जिंदगी पाने के लिये आर्थिक सहायता भी प्रदान की।
आग की लपटों से झुलसे राजस्व कर्मचारियों द्वारा चिन्हित 57 घरों के लोगों को पहली किस्त के रूप में इंदिरा आवास के तहत गृह निर्माण के लिये 26200 रुपये दिये गये। यहां बताया गया कि घरों ंकी जब छत पड़ने का नम्बर आयेगा तो उन्हें 8800 रुपया और दिया जायेगा। इसके साथ ही इन्हीं परिवारों के लिये बर्तन व कपड़ा खरीदने के लिये 5000 रुपये का चेक प्रदान किया गया साथ ही 1000 रुपया पशुओं के चारे के लिये भी दिया गया। इसी अवसर पर जिला रेडक्रास सोसायटी द्वारा एक साड़ी, एक लुंगी और एक कम्बल का वितरण किया गया। जिला मुख्य चिकित्साधिकारी ने भी अपने विभाग की ओर से प्रत्येक परिवार को एक-एक हजार रुपया नकद सहायता राशि दी।
यही पर जमौली गांव में नरेगा के अंतर्गत होने वाले विकास कार्यो के लिये पहली किस्त के रुप में 5.70 हजार का चेक भदेदू प्रधान शिवकलिया को
सौंपा गया। इस योजना के तहत पीडि़त प्रत्येक परिवार के एक व्यक्ति का जाब कार्ड बनाया गया। वैसे विकास कार्यो को 19 जून से प्रारंभ हो चुके हैं। इसके मुख्य काम जमौली गांव के लिये सम्पर्क मार्ग, गांव के अंदर गलियों में खडंजा एवं सीसी रोड़ व नाली के साथ ही तालाब का निर्माण कराया जायेगा।
इसके साथ ही पीडि़त परिवारों के भरण पोषण के लिये 3 कुंटल चावल व 2 कुंटल गेहूं का भी वितरण किया गया।
वैसे इस गांव में 17 जून से ही विस्थापित ग्राम वासियों को तहसील स्तर पर ही निशुल्क भोजन की व्यवस्था कराई जा रही है। उन्हें तीन समय का भोजन दिया जा रहा है। इसके पूर्व जिला रेडक्रास सोसायटी की तरफ से 540 फिट तिरपाल का वितरण किया जा चुका है।
इस अवसर पर सीडीओ पीसी श्रीवास्तव, एसडीएम ह्षीकेश भास्कर यशोद, तहसीलदार अश्विनी कुमार श्रीवास्तव आदि अधिकारी मौजूद रहे।
नही मिल सकी इन्हें राहत
इनके घर तो जल गये पर ये गांव में नही रहते। सूखे की विभीषिका और कम आमदनी में पेट न भरने के कारण बाहर चला जाना इन्हें मंहगा पड़ गया। राजस्व कर्मचारियों ने अपनी बनाई लिस्ट में इनके मकान जलने के बाद भी जगह नही दी। राजेश पुत्र जगन्नाथ गांव में पेट न भरने के कारण प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रिक्शा चलाता है व राजेन्द्र कुमार पुत्र जगन्नाथ दिल्ली में रहकर दिहाड़ी मजदूर हैं पर दोनो का नाम लिस्ट से गायब था। लिहाजा ये सहायता पाने से वंचित रह गये। इसके साथ ही बारह नाम ऐसे हैं जिनके मकान गांव में हैं और वे आग लगने के दौरान गांव से बाहर थे। इनका भी सब कुछ आग से राख हो गया पर लेखपाल की कृपादृष्टि इन पर नही पड़ी। गजोधर पुत्र जगमोहन, काशी प्रसाद पुत्र प्रभुदयाल, राजू पुत्र राम प्रसाद, मोती लाल पुत्र बोदा, भालेन्द्र पुत्र गया प्रसाद, दुजिया पत्नी धर्मपाल, राजकुमार पुत्र राम प्रसाद, दिनेश कुमार पुत्र राम प्रसाद, रमेश कुमार पुत्र ज्ञान पाल ने बताया कि वे लोग गांव में ही रहकर मजदूरी करते हैं, पर लेखपाल ने उनका नाम पीडि़तों की लिस्ट में नही दिया। जबकि उनके मकान भी पूरी तौर पर जल गये हैं। सोमवार को भी वे अपने प्रार्थना पत्र लिये टहलते रहे पर राजस्व कर्मियों ने उन्हें बैंरग वापस भेजने के साथ ही मुख्य सभा स्थल से दूर ही रखा।

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