शनिवार, 4 जुलाई 2009

दीवारें कच्ची होने से लंबी चली नान से मुठभेड़

Jul 02, 10:32 pm
चित्रकूट। डाकू घनश्याम केवट से 51 घंटे मुठभेड़ के कारण जानने कभी यहां एसपी रहे डीजी पीएसी पीपीएस सिद्धू को लेकर एडीजी बृजलाल जमौली गांव पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने गांव की हर उस जगह को देखा, जहां दस्यु नान ने पुलिस से मोर्चा लिया था। डीजी पीएसी ने खुद कई स्थानों की फोटोग्राफी भी की।
डीजी पीएसी ने गांव भ्रमण के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वे यहां पर सबक लेने आये हैं कि कभी इस तरह की समस्या दोबारा उत्पन्न हो जाए तो उससे निपटने के लिए सुरक्षित रणनीति क्या हो। गांव की भौगोलिक परिस्थिति को देखकर कहा कि मिट्टी की दीवारों में गोली प्रभावी ढंग से काम नही कर सकती थी और खपरैल के मकानों में आग ने भी डाकू को ज्यादा क्षति नही पहुंचाई। इसके कारण ही इस डाकू को मारने में ज्यादा समय लगा। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं में स्थानीय पुलिस ज्यादा प्रभावी ढंग से काम करती है। यह पूछे जाने पर कि जब डाकू छत से कूदकर भाग रहा था तो गोली क्यों नहीं चलायी गई तो उनका जवाब था कि गोली से क्रॉस फायरिंग में हमारे ही जवान या फिर किसी निर्दोष की जान जा सकती थी। उन्होंने डाकू घनश्याम को मारे जाने के पीछे सामूहिक प्रयास की बात पर बल देते हुये कहा कि यह बात और है कि बाद में उसे हमारे कुछ जवानों ने मार गिराया पर इस ऑपरेशन में लगे सभी लोग बधाई के पात्र हैं। घायल सिपाहियों को सहायता राशि दिये जाने की बाबत एडीजी बृजलाल ने कहा कि सात घायलों को तीन-तीन लाख व एक आंशिक घायल को पचास हजार रुपये दिये जाने की जानकारी उन्हें है। उन्होंने दस्यु प्रभावित जिलों में पुलिस के पास संसाधनों की कमी पर बताया कि इस प्रकार के हर जिले में अच्छी मात्रा में पीएसी दी गई है। पुलिस के पास भी पर्याप्त मात्रा में संसाधन हैं। दोनों ने इसके बाद गांव व मुख्यालय के डाक बंगले में अपने अधीनस्थ कर्मियों के साथ बैठक कर आवश्यक निर्देश दिये। साथ ही यहां की भौगोलिक परिस्थितियों के बारे में पूरी जानकारी कर डाकुओं के सफाये की रणनीति में आवश्यक फेरबदल भी किये। एसपी राकेश प्रधान, एएसपी जुगुलकिशोर के साथ एसओजी के जवान मौजूद रहे।

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