Jul 02, 10:33 pm
चित्रकूट। 'भइया सरकार के कर्मचारी चाहै जो कहैं पै हमैं एक हजार रूपया के साथै गल्ला भर मिला है'। यह उनके अल्फाज हैं जो एक डाकू के गांव में घुसने के कारण अपना सब कुछ गंवा चुके हैं। ग्राम जमौली के हर एक घर की कहानी अलग-अलग है, पहले डाकू के कारण पूरा गांव जला दिया गया, फिर राहत के नाम पर कहा तो काफी कुछ गया पर देने की जगह में लेखपाल की आधी-अधूरी और 'खेल' की हुई लिस्ट का सहारा लिया गया। जिसका लाखों से ज्यादा का नुकसान था उसे एक हजार मिला और जिसका नुकसान लाखों में हुआ उसको मिलने की बात तो दूर पीडि़तों की लिस्ट से नाम उड़ा दिया गया।
घटना के समय अपने रिश्तेदार की शादी में जाने वाली जुगराज की पत्नी सुनैना और अमित लाल की पत्नी कुसुम बताती है उन्हें आर्थिक सहायता के नाम पर अभी तक कुल 1000 रुपया नकद ही मिला है। इसमें न तो घर बन सकता है और न ही बर्तन कपड़े ही खरीदे जा सकते हैं। रिश्ते में जेठानी व देवरानी लगने वाली सुनैना व कुसुम बताती है कि घटना के समय वे अपने रिश्तेदार की बेटी की शादी में बाहर थीं बाद में जब आकर देखा तो यहां पर हाल काफी खराब था। ताला बंद घर के न तो किवाड़ सुरक्षित थे और नही घर का कोई भी समान सुरक्षित बचा था। सभी कुछ आग में जल कर खाक हो चुका था। राहत के नाम पर सरकार ने उन्हें एक हजार रुपयों के अलावा दो कुन्टल गेंहू, तीन कुंटल चावल के साथ ही एक साड़ी, एक कंबल व एक गमछा व एक तिरपाल दी है। उन्होंने लेखपाल पर आरोप लगाया कि जिसने भी उसे खुश किया उनको तो पांच हजार दिला दिया पर जो खुश करने में नाकाम रहे उसे पांच हजार नही दिलाये।
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